सड़कों में गड्ढे या गड्ढों में सड़कें... के हालात पूरे प्रदेश में गहराए हुए हैं। राजधानी भोपाल में जो हालात पसरे हैं, उनको देखकर छोटे शहरों और कस्बों तक फैली मुश्किलों को आसानी से समझा जा सकता है। वर्ष 2024 के शुरुआती 8 महीनों में सड़क हादसों का जो आंकड़ा सामने आया है, वह पिछले वर्षों की तुलना में करीब 31 प्रतिशत बढ़ा हुआ है।
राजधानी यातायात पुलिस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक यहां 2024 के पहले 8 महीनों में सड़क दुर्घटनाओं से मृत्यु दर में 31 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 30 जून 2024 के बीच 1,502 सड़क दुर्घटनाओं में 167 लोगों की मृत्यु हो गई, जबकि 1,115 लोग घायल हुए। इसी अवधि में 2023 में, 1,513 सड़क दुर्घटनाओं में 97 लोगों की मृत्यु हुई और 1,144 लोग घायल हुए।
सड़क इंजीनियरिंग में गड़बड़
पहली छमाही में शहर की पुलिस ने उल्लंघनकर्ताओं को कुल 25,738 चालान जारी किए हैं। हेलमेट न पहनने के लिए 25,738, शराब पीकर गाड़ी चलाने के लिए 362, और ओवरस्पीडिंग के लिए 1,186 चालान बनाए गए हैं। इतनी सख्ती के बावजूद, ट्रैफिक अधिकारियों ने सड़क दुर्घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि को नोट किया है। कई दुर्घटनाओं के लिए सड़क इंजीनियरिंग कारण बताया है, जिसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। अधिकारियों ने जोर दिया कि लोगों को समझना चाहिए कि शहर की सड़कें उनके हाई-एंड बाइक और एसयूवी के ओवरस्पीड के लिए ठीक नहीं हैं, जिनकी अधिकतम गति 150-200 किमी/घंटा होती है।
दुर्घटनाओं के हॉटस्पॉट
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक घटनाएं मिसरोद क्षेत्र में दर्ज की गई हैं। इस क्षेत्र में छह महीने में 76 सड़क दुर्घटनाओं में 13 लोगों की मृत्यु हुई। इसके बाद कोह-ए-फिजा और बैरागढ़ का स्थान आता है, जहां इसी अवधि के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 10 लोगों की मृत्यु हुई। कोह-ए-फिजा में कुल 102 सड़क दुर्घटनाओं की रिपोर्ट की गई, जबकि बैरागढ़ में 47 दुर्घटनाएं हुईं। खजुरी क्षेत्र में 59 सड़क दुर्घटनाओं में आठ लोगों की मृत्यु हुई, कोलार में 64 दुर्घटनाओं में सात लोगों की मृत्यु हुई और टीटी नगर में 58 दुर्घटनाओं में सात लोगों की मृत्यु हुई। पिपलानी, रातीबड़ और छोला क्षेत्र में प्रत्येक में छह लोगों की मृत्यु हुई।
डेटा की कमी और सुधार की आवश्यकता
एक वरिष्ठ ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हर सड़क दुर्घटना के बाद, पुलिस अधिकारियों को दुर्घटना स्थल पर जाकर सड़क दुर्घटना के कारण को एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (आईआरएडी) में दर्ज करना होता है, जो विशिष्ट स्थान पर सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करने में मदद करता है। लेकिन अधिकांश मामलों में, पुलिस अधिकारी सड़क इंजीनियरिंग दोषों जैसे किसी भी अंधे मोड़ या सड़क डिजाइन दोष को नहीं समझते और उन्हें दर्ज नहीं करते। वे सड़क पर बैठी हुई आवारा गाय या मौसम की स्थिति जैसे कई अन्य कारणों को भी मिस कर देते हैं और इन्हें डेटाबेस में दर्ज नहीं करते। कई पुलिसकर्मी तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण सॉफ्टवेयर में सही डेटा दर्ज नहीं कर पाते। इस समस्या के कारण सड़क दुर्घटनाओं के कारण कई कारक उजागर नहीं होते हैं।