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Bhopal News: औकाफ-ए-शाही ने वक्फ एक्ट दरकिनार कर की नियुक्ति, अब उठ रहे सवाल

Sat, 11 May 2024 05:55 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

औकाफ ए शाही के प्रबंधक मंडल में तीन दिन पहले बदलाव किए गए हैं। इसके मुताबिक पूर्व कमेटी को आनन-फानन में भंग कर नई कमेटी तय कर दी गई है।
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शबा सुलतान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जीतने वाले, परिणाम लाने वाले या कुछ नया कर दिखाने वाले पर भरोसा कर कोई जिम्मेदारी सौंपी जाए तो उम्मीद की जा सकती है कि बेहतरी के रास्ते निकलने वाले हैं। लेकिन औकाफ ए शाही ने नवाब कालीन संपत्तियों को सहेजने का जिम्मा ऐसे व्यक्ति को सौंप दिया है, जिसके पास न समय है और न बिगड़े कामों को सहेज पाने की ऊर्जा। हद यह भी है कि यह नियुक्ति वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत कर दी गई है। औकाफ ए शाही मुतवल्ली सबा सुलतान द्वारा लिए गए फैसले को लेकर अब चर्चाओं का दौर चल पड़ा है कि आखिर इस फैसले के पीछे की रणनीति क्या है।

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औकाफ ए शाही के प्रबंधक मंडल में तीन दिन पहले बदलाव किए गए हैं। इसके मुताबिक पूर्व कमेटी को आनन-फानन में भंग कर नई कमेटी तय कर दी गई है। इस तीन सदस्यीय नई कमेटी में सिकंदर हफीज खान, शादाब रहमान और अब्दुल मुक्तदिर खान को शामिल किया गया है। नई व्यवस्था के मुताबिक, पूर्व सचिव आजम तिरमिजी से पॉवर ऑफ अटॉर्नी तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है। मप्र वक्फ बोर्ड को इस बारे में सूचित कर दिया गया है।

अधिनियम की अनदेखी
वक्फ अधिनियम 1995 कहता है कि वक्फ मामले का कोई भी दोषी व्यक्ति औकाफ की किसी भी कमेटी में शामिल नहीं किया जा सकता। लेकिन सूत्रों का कहना है कि औकाफ ए शाही की नई कमेटी में शामिल किए गए उद्योगपति सिकंदर हफीज खान वक्फ मामलों के दोषी हैं। बताया जाता है कि बड़ा बाग स्थित औकाफ ए शाही की संपत्ति पर उनके परिवार के सदस्यों के अवैध कब्जे को लेकर उन्हें आरोपी बनाया गया है, जिसके चलते उनके खिलाफ वक्फ एक्ट की धारा-54 मामला प्रचलन में है।
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पहले दिया था इस्तीफा
जानकारी के मुताबिक, सिकंदर हफीज पूर्व में भी औकाफ ए शाही में शामिल रह चुके हैं। इस कार्यकाल में मक्का और मदीना की रुबात को लेकर उठे विवादों के चलते उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कहा जाता है कि भोपाल रियासत के हाजियों को हज के दौरान सऊदी अरब में मिलने वाली मुफ्त ठहरने की सुविधा सिकंदर हफीज के कार्यकाल में ही रुकी थी, जो अब तक बहाल नहीं हो पाई है, जिसके चलते सैंकड़ों हाजियों को रिहाइश के नाम पर बड़ी रकम खर्च करने की मजबूरी बनी हुई है। निवृत्तमान सचिव आजम तिरमिजी ने इन रुबात की बहाली और कानूनी मामलों को निपटाने के लिए गंभीर प्रयास किए, लेकिन मुतवल्ली सबा सुलतान की अरुचि के चलते मामला अब भी अटका हुआ है।

भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट

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