घूसखोरी अपराध। (सांकेतिक तस्वीर)
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ऐशबाग थाने के एएसआई पवन रघुवंशी द्वारा फर्जी कॉल सेंटर संचालक मोहम्मद अफजल के बेटे, साले और टीकमगढ़ के कुछ और लोगों को आरोपी नहीं बनाने के लिए 20 लाख रुपये में सौदा करने और पांच लाख की पहली किश्त लेते हुए गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में ऐशबाग थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी जितेन्द्र गढ़वाल, एएसआई मनोज कुमार, प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह को भी आरोपी बनाया गया और निलंबित हैं। पवन रघुवंशी अभी फरार है, जितेन्द्र गढ़वाल और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने समानता का अधिकार का लाभ देते हुए शुक्रवार को एएसआई मनोज कुमार को भी जमानत दे दी है। हालांकि सभी पुलिसकर्मी फरार ही चल रहे थे, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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भोपाल जिला अदालत के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों के विशेष न्यायधीश आरपी मिश्रा की कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों पर समान आरोप हैं, लिहाजा मनोज कुमार को भी जमानत का लाभ मिलनी चाहिए। एएसआई मनोज कुमार को 50 हजार के निजी मुचलते पर जमानत दी गई है। केस का मुख्य आरोपी एएसआई पवन रघुवंशी, रिश्वत कांड का बिचौलिया टीकमगढ़ निवासी भाजपा पार्षद अंशुल जैन और रिश्वत भेजने वाला कॉल सेंटर मामले का मास्टरमाइंड मोइन खान फरार है। मामले की जांच एसआईटी कर रही है।