भोपाल से भाजपा प्रत्याशी आलोक शर्मा पांच लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है। उन्होंने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। शर्मा को 9 लाख 81 हजार 109 वोट मिले हैं। जबकि कांग्रेस कैंडिडेट अरुण श्रीवास्तव को 4 लाख 89 हजार 610 वोट प्राप्त हुए।
बता दें, 2019 में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को 3 लाख 64 हजार 822 वोटो से मात दी थी। यह अभी तक का रिकॉर्ड जीत थी। अब इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए आलोक शर्मा ने बड़ी जीत दर्ज की है। हालांकि, आलोक शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि यह जीत प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के चलते मिली है। उन्होंने भोपाल की जनता को आभार जताया है। भोपाल लोकसभा सीट से 22 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। यहां नोटा को 6629 वोट मिले हैं। सभी प्रत्याशियों को मिलाकर 14 लाख 91 हजार 664 वोट गिने गए।
प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक ने किया रोड शो
भोपाल से आलोक शर्मा की जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोड शो किया। वहीं भाजपा भोपाल सीट पर पूरी रणनीति के साथ चुनाव लड़ा। भोपाल सीट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हर छोटा-बड़ा नेता और कार्यकर्ता यहां सक्रिय रहा, जबकि कांग्रेस की तरफ से कोई खास चेहरा चुनाव प्रचार के लिए नहीं आया। यहां कांग्रेस के दमदार नेता एडवोकेट अरुण श्रीवास्तव और भाजपा द्वारा घोषित प्रत्याशी आलोक शर्मा आमने-सामने थे। भोपाल संसदीय क्षेत्र में लंबे समय से भाजपा ही जीत रही है।
दो बार विधानसभा का चुनाव करने के बाद मिली जीत
भोपाल से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी आलोक शर्मा को कड़ी मेहनत के बाद लोकसभा चुनाव 2024 में बड़ी जीत मिली है। उन्हें दो बार भोपाल से विधानसभा चुनाव लड़ाया गया था, जिसमें उन्हें हर का सामना करना पड़ा था। हालांकि, आलोक शर्मा एक बार भोपाल के महापौर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा था कि विधानसभा मे हार के बाद उन्हें भाजपा आला कमान द्वारा आश्वासन दिया गया था कि उन्हें लोकसभा चुनाव में मौका दिया जाएगा।
भोपाल लोकसभा सीट पर ऐसा है वोट का गणित
भोपाल लोकसभा में आठ विधानसभा सीटें हैं। यहां लोकसभा में 24 लाख से ज्यादा वोटर हैं। यहां पांच लाख के करीब मुस्लिम वोटर हैं। 3.50 लाख से ज्यादा ब्राह्मण वोटर हैं। भोपाल में ढाई लाख से ज्यादा कायस्थ वोटर हैं। क्षत्रिय वोटरों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। ओबीसी, एससी-एसटी और सिंधी वोटर की संख्या 8 लाख से ज्यादा है। भोपाल में विधानसभा सीटें बैरसिया, भोपाल उत्तर, नरेला, भोपाल दक्षिण पश्चिम, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि भोपाल उत्तर और भोपाल मध्य पर कांग्रेस का कब्जा है।
भोपाल में 1989 से लगातार जीत रही है भाजपा
भोपाल संसदीय सीट पर शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा। कांग्रेस को यहां 1957, 1962, 1971, 1980 और 1984 में जीत मिली थी, लेकिन उसके बाद से कांग्रेस कभी भी यह सीट जीत नहीं पाई। 1989 से लेकर 2019 तक भोपाल को बीजेपी को जीत मिली है। 1989 से लेकर 1998 तक में सुशील चंद्र वर्मा जीतते रहे तो 1999 में यहां उमा भारती को जीत मिली थी। इसके बाद दो बार 2004 और 2009 में कैलाश जोशी जीते थे। इसके बाद 2014 में आलोक संजर और 2019 में प्रज्ञा सिंह ठाकुर जीत मिली।
कांग्रेस प्रत्याशी अरुण श्रीवास्तव ने स्वीकार की हार
भोपाल के कांग्रेस लोकसभा प्रत्याशी अरुण श्रीवास्तव ने चुनाव में पराजय स्वीकार करते हुए भोपाल की जनता का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने जनता से कहा है कि भोपाल लोकसभा क्षेत्र के सभी सम्माननीय मतदाता भाइयों, बहनों, बुजुर्ग, युवा साथियों भोपाल लोकसभा का यह चुनाव ऐतिहासिक था। इसमें आप सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और लोकतंत्र को समृद्ध बनाने में अपना योगदान दिया।