पत्नी के साथ रहने से किया इंकार, तब तलाक पर बनी बात
कई दौर की काउंसलिंग के बाद जब मामला नहीं सुलझा तो फिर एक मौका दोनों को दिया गया। इसके बाद पुरुष अधिकारी ने कहा कि मैं अपनी पत्नी के साथ रहना ही नहीं चाहता। इसके बाद पत्नी ने अपनी और दोनों बेटियों के भविष्य व परवरिश के लिए राशि का खर्च उठाने का मामला लगाया। इसके बाद दोनों के बीच डेढ़ करोड़ में समझौता हो गया। इस समझौते को पुरुष अधिकारी की प्रेमिका ने कोर्ट के बाहर कराया और कोर्ट से इसे स्वीकारोक्ति दिलाई। प्रेमिका ने ही अधिकारी की पत्नी को डेढ़ करोड़ की राशि से ही एक डुप्लेक्स खरीदकर दिया और बाकी बची राशि 27 लाख नकद दे दी। इसके बाद दोनों पक्षों में आपसी सहमति से तलाक हो गया।
पांच वर्ष तक नोकझोंक काउंसलिंग के बाद हुआ तलाक
काउंसलिंग के दौरान पति ने स्वीकार किया कि वह अपनी सहकर्मी अधिकारी के साथ रहना चाहता है। वह बेटियों को प्यार करता है, लेकिन वह पत्नी के साथ नहीं रह सकता। पति-पत्नी के बीच नोकझोंक और काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया करीब पांच वर्ष तक चली। बच्चों के भविष्य को देखते हुए दंपति ने आपसी समझौते से तलाक लिया। कुटुंब न्यायालय में दोनों के विवाह विच्छेद की रजिस्टर्ड प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।