काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी
- फोटो : सोशल मीडिया
नमाज, रोजा, हज, जकात अल्लाह ने हर मुस्लिम पर फर्ज करार किए हैं। इससे अहम काम बहन-बेटी को पिता की जायदाद से हिस्सा अदा किया जाना बताया गया है। इसकी अहमियत इससे अंदाज लगाई जा सकती है कि जहां इस्लाम के बाकी फर्जों की जानकारी अपने पैगंबर के जरिए लोगों तक पहुंचाई है। वहीं बहन बेटी के हिस्से की अदायगी का हुक्म खुद अल्लाह ने कुरआन से दिया है।
काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने शुक्रवार को मस्जिद कल्लू बुआ में जुमा की नमाज अदा कराने से पहले अपनी तकरीर में कही। उन्होंने बेटी और बहन को दहेज की बजाए मीरास में हिस्सा दें, विषय पर बयान करते हुए कहा कि आम लोग बेटियों की शादी में दिए जाने वाले दहेज को ही अपनी जिम्मेदारी से फारिग मान लेते हैं। लेकिन यह अल्लाह के हुक्म की तामील नहीं कहा जा सकती है। शहर काजी ने कहा कि बेटियों को मीरास में हिस्सा दिया जाना हर इंसान पर फर्ज और कर्ज है। इसकी अदायगी न किए जाने का हिसाब अल्लाह खुद अपने बंदे से उसकी मौत के बाद करेंगे। शहर काजी ने शादियों को सस्ता और आसान बनाने पर जोर देते हुए मीरास की तकसीम को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर हो कि इंसान अपने जीवन काल में ही यह काम पूरा कर ले। अगर बिना इसको किए उसका इंतकाल हो जाए तो उसके दफन से पहले इस फर्ज को पूरा कर लिए जाने का हुक्म कुरआन से है।
शहर काजी ने कहा कि किसी बात को अन्य बातों का हवाला देकर टाल दिए जाने की बजाए अल्लाह के हुक्म का वैसा ही पालन किया जाना चाहिए, जैसा हुक्म दिया गया है। नमाज ए जुमा से पहले हुए इस खास बयान को सुनने वालों की बड़ी तादाद मौजूद थी। तकरीर के बाद शहर काजी ने अंत में शहर, प्रदेश, देश और दुनिया में अमन, चैन और शांति की दुआ भी कराई।
(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)