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Bhopal: हमीदिया में महिला ने किडनी देकर बचाई अपने पति की जान, 49 वर्षीय व्यक्ति का हुआ किडनी ट्रांसप्लांट

Wed, 20 Nov 2024 09:54 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक महिला ने साहस दिखाते हुए अपने पति को किडनी दे कर जान बचाई है। बुधवार को 49 वर्षीय व्यकित का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने ट्रांसप्लांट करने वाली पूरी टीम को बधाई दी है। 
 
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ट्रांसप्लांट करती चिकित्सकों की टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के राजधानी भोपाल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हमीदिया में एक बार फिर से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की गई है। बुधवार को 40 वर्षीय महिला ने अपनी किडनी देकर अपने 49 वर्षीय पति की जान बचाई है। किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि महिला ने साहस दिखाया जिसके बाद उनका ब्लड टेस्ट कराया गया और 2 साल से बीमार चल रहे उनके पति को किडनी ट्रांसप्लांट की गई है। इधर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली पूरी टीम को शुभकामनाएं दी है और उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। गांधी मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान भारत योजना के तहत सफल गुर्दा प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) किया गया है।
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2 साल से खराब थी किडनी, 6 महीने से डायलिसिस पर था मरीज 
डीन जीएमसी भोपाल डॉ. कविता सिंह ने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए मरीज, 49 वर्षीय मनुज कुमार (परिवर्तित नाम), लंबे समय से किडनी रोग से पीड़ित थे। उन्हें दो वर्ष पहले हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के दौरान किडनी की आनुवांशिक बीमारी ADPKD (Adult Polycystic Kidney Disease) का पता चला था। 6 महीने पहले उन्हें डायलिसिस पर रखा गया। डीन डॉ. सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी कमला (परिवर्तित नाम) ने साहस दिखाते हुए अपनी एक किडनी दान कर उन्हें नया जीवन दिया। 


लैप्रोस्कोपिक पद्धति से हुई सर्जरी
डॉ हिमांशु शर्मा ने बताया कि प्रत्यारोपण में लैप्रोस्कोपिक पद्धति से सर्जरी की गई है। इस पद्धति से ऑपरेशन के कम असुविधा होती है और डोनर जल्दी स्वस्थ हो जाता है।  डॉक्टरों के मुताबिक, इस विधि में डोनर को अपेक्षाकृत कम तकलीफ होती है और एक दिन में ही उसे डिस्चार्ज भी किया जा सकता है। यह सफल प्रत्यारोपण डीन डॉ. कविता सिंह और अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु शर्मा, डॉ. आरआर बर्डे, प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. सौरभ जैन (विभागाध्यक्ष, यूरोलॉजी), डॉ. अमित जैन, डॉ. समीर व्यास, डॉ. नरेंद्र कुर्मी, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. आरपी कौशल (विभागाध्यक्ष, निश्चेतना), डॉ. बृजेश कौशल, डॉ. श्वेता श्रीवास्तव, डॉ. राजकुमार अहिरवार, डॉ. असीम, जूनियर डॉक्टर: डॉ. रंजीत, डॉ. सौरभ, डॉ. अजय, डॉ. स्कंद, डॉ. रोहित, डॉ. दुर्गेंद्र, डॉ. नेहा, डॉ. लीना, डॉ. अरविंद, डॉ. कीर्ति सहित नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल टीम ने किया।
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मध्य प्रदेश को हेल्थकेयर हब के रूप में स्थापित करने का प्रयास
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा है कि यह सफल प्रत्यारोपण न केवल प्रदेश में टर्शियरी हेल्थ केयर को नई दिशा देगा। मध्य प्रदेश को हेल्थकेयर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का सहज प्रदाय शासन की प्राथमिकता है। शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से प्रदेश में गरीब और वंचित परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान किया जा रहा है। गंभीर बीमारियों का इलाज और महंगे ऑपरेशन अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी संभव हो गए हैं। यह योजना न केवल बीमारियों के इलाज का साधन है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का एक मजबूत आधार भी है।
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