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Bhopal: एम्स में शुरू होंगे हाइब्रिड कार्डियक ऑपरेटिंग रूम्स, हृदय रोग के मरीजों की सर्जरी होगी आसान,बढ़े मरीज

Sat, 07 Dec 2024 06:23 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

एम्स में आने वाले हृदय रोग से संबंधित मरीजों के लिए अच्छी खबर है। यहां जल्द ही अत्याधुनिक हाइब्रिड कार्डियक ऑपरेटिंग रूम्स शुरू किए जाएंगे। इसको लेकर  डॉ. विक्रम वट्टी ने कॉन्जेनिटल एंड स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लिया।
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एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ठंड शुरू होते हुए हृदय संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है। इस दौरान राजधानी भोपाल स्थित एम्स में हृदय रोग से संबंधित आने वाले मरीजों के लिए अच्छी खबर है। यहां जल्द ही अत्याधुनिक हाइब्रिड कार्डियक ऑपरेटिंग रूम्स शुरू किए जाएंगे। इसको लेकर एम्स भोपाल के कार्डियो थोरासिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर, डॉ. विक्रम वट्टी ने कॉन्जेनिटल एंड स्ट्रक्चरल हार्ट (CASH) इंटरवेंशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लिया। यह कार्यक्रम चेन्नई में मद्रास मेडिकल मिशन द्वारा आयोजित किया गया। एम्स में इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। जल्द ही मरीजों को यह सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
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हाइब्रिड ऑपरेटिंग रूम 
हाइब्रिड ऑपरेटिंग रूम वह होता है जिसमें उन्नत और परिष्कृत इमेजिंग सिस्टम जैसे कि MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) स्कैनर , CT या CAT (कंप्यूटेड टोमोग्राफी या कम्प्यूटरीकृत एक्सियल टोमोग्राफी) स्कैनर, फिक्स्ड C-आर्म्स और अन्य इमेजिंग डिवाइस होते हैं । जैसा कि हमने कहा, इसका उद्देश्य रोगी के शरीर पर शल्य चिकित्सा द्वारा हस्तक्षेप करने में सक्षम होना है, लेकिन न्यूनतम आक्रामक तरीके से। हालांकि, सर्जरी करने से पहले, अस्पताल की सुविधाओं में एक हाइब्रिड ऑपरेटिंग रूम को ठीक से डिज़ाइन और तैयार किया जाना चाहिए , और इसे हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए: 


सभी सुविधाओं से युक्त ऑपरेटिंग रूम
एम्स के डॉ. वट्टी ने हाइब्रिड कार्डियक ऑपरेटिंग रूम्स की भूमिका और इसके आधुनिक हृदय देखभाल में योगदान के बारे में अपने विचार साझा किए। हाइब्रिड कार्डियक ऑपरेटिंग रूम्स एक अत्याधुनिक सर्जिकल सुइट है, जिसमें उन्नत इमेजिंग तकनीक और सभी सुविधाओं से युक्त ऑपरेटिंग रूम की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। इस नवाचार के माध्यम से डॉक्टर पारंपरिक सर्जिकल प्रक्रियाओं और मिनिमली इनवेसिव इंटरवेंशनल टेक्निक्स को एक ही स्थान पर बिना किसी विघ्न के कर सकते हैं। हाइब्रिड कार्डियक सर्जरी का उपयोग विभिन्न हृदय रोगों के इलाज के लिए किया जाता है, जैसे कि एंडोवस्कुलर एओर्टिक रिपेयर, हाइब्रिड कोरोनरी आर्टरी रिवास्कुलराइजेशन, हाइब्रिड एरिथमिया प्रक्रियाएं, और हाइब्रिड कॉन्जेनिटल प्रक्रियाएं।
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सर्जिकल जटिलताओं का जोखिम कम
डॉ. वट्टी ने कहा कि हाइब्रिड कार्डियक सर्जरी के कई लाभ हैं, जैसे कि सर्जिकल जटिलताओं का जोखिम कम होना, रिकवरी में कम समय लगना। इस कारण मरीजों एवं उनके परिवारों को भी कम तनाव होगा। हाइब्रिड सर्जरी को एक स्टेज या दो स्टेज प्रक्रिया के रूप में किया जा सकता है। एक स्टेज प्रक्रिया में सभी उपचार एक ही सत्र में किए जाते हैं, जबकि दो स्टेज प्रक्रिया में कैथिटर-बेस्ड इंटरवेंशंस और शल्य चिकित्सा के बीच एक अंतराल होता है। मद्रास मेडिकल मिशन ने देश भर से 20 कार्डियोलॉजिस्ट को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, डॉ. विक्रम वट्टी इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में आमंत्रित होने वाले एकमात्र कार्डियक सर्जन थे। यह कार्यक्रम मद्रास मेडिकल मिशन के डॉ. के. शिव कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया गया जिसने देश के अग्रणी चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और ज्ञान साझा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।


पारंपरिक ऑपरेटिंग थिएटर की तुलना में हाइब्रिड ऑपरेटिंग थिएटर के लाभ
1- हस्तक्षेप कम समय में किया जाता है और सुरक्षा अधिक सुनिश्चित होती है, तथा संक्रमण का जोखिम भी कम होता है। 
2- सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताएं और परिणाम कम होते हैं, जिससे सर्जरी के बाद रिकवरी तेजी से होती है और अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है। 
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3- ऑपरेशन के दौरान वास्तविक समय में अधिक जानकारी। रोगी को कम शारीरिक आघात।
4- यह विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त विशेषज्ञों के बहुविषयक कार्य को सुविधाजनक बनाता है।
5-  इसमें कम चीरे लगेंगे, क्योंकि यह कम आक्रामक प्रक्रिया है। निदान और हस्तक्षेप एक ही समय में किया जा सकता है।
6- प्रभावित क्षेत्र की मरम्मत के लिए आवश्यक सूक्ष्म कैथेटर के प्रयोग के कारण, रोगी में बड़ा छेद किए बिना ऑपरेशन करना संभव हो जाता है।
7- यह पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कम विकिरण उत्सर्जित करती है और छवि की गुणवत्ता बेहतर होती है।
8- यह रोगी को ऑपरेशन थियेटर, रेडियोलॉजी या आईसीयू के बीच स्थानांतरित करते समय सुरक्षा को न्यूनतम करने में मदद करता है।
9- इसकी इमेजिंग प्रणाली छोटे चीरों के साथ काम करना संभव बनाती है, बिना मरीज को खोले और यहां तक कि सबसे जटिल ऑपरेशन में भी। 


 

 

 
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