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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: भोपाल की ऐतिहासिक रियाज मंजिल पर बेदखली एक्शन स्थगित, केंद्र को फैसला लेने के निर्देश

Tue, 20 Oct 2026 01:01 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

करीब 95 करोड़ रुपये मूल्य की रियाज मंजिल और उससे जुड़ी संपत्तियों पर बेदखली की कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष 15 दिन में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
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रियाज मंजिल भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने भोपाल की करीब 95 करोड़ रुपये मूल्य की शत्रु संपत्ति 'रियाज मंजिल' और उससे जुड़ी संपत्तियों पर बेदखली की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने इस मामले में दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार के समक्ष अपनी बात रखने की छूट प्रदान की है। अदालत के इस आदेश के बाद तहसील हुजूर के ग्राम कोहेफिजा स्थित लगभग आठ हैक्टेयर में फैली इन शत्रु संपत्तियों पर उप-विभागीय अधिकारी द्वारा जारी बेदखली संबंधी कार्रवाई स्थगित रहेगी और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी।

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उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 की धारा 18 के तहत 15 दिन के भीतर केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव अथवा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। न्यायालय ने निर्देशित किया है कि निर्धारित समय-सीमा में आवेदन प्राप्त होने पर संबंधित प्राधिकारी दोनों पक्षों की बात सुनेगा और साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। 

प्राधिकारी को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी करने के पश्चात 60 दिन के भीतर तर्कसंगत निर्णय लेना होगा। जब तक केंद्र सरकार का यह सक्षम प्राधिकारी इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुना लेता, तब तक उप-विभागीय अधिकारी की बेदखली संबंधी कार्रवाई और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर पूर्ण रोक लागू रहेगी।
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नोटिस और सुनवाई के अभाव पर उठाए सवाल
मामले में याचिकाकर्ता आजम हसन खान ने तहसील हुजूर के ग्राम कोहेफिजा स्थित खसरा नंबर 42/19/1 (क्षेत्रफल 0.5240 हैक्टेयर) और खसरा नंबर 42/19/2 (क्षेत्रफल 0.0830 हैक्टेयर) के संबंध में जारी किए गए बेदखली नोटिसों को अदालत में चुनौती दी थी। ये नोटिस प्रकरण संख्या 1367/अ.वि.अ./2026 और 1369/अ.वि.अ./2026 के अंतर्गत जारी किए गए थे। याचिका में 29 अप्रैल 2024 को शत्रु संपत्ति अधिनियम की धारा 12 के तहत जारी वेस्टिंग सर्टिफिकेट को भी चुनौती दी गई थी। 

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याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रमाणपत्र जारी करते समय शत्रु संपत्ति नियम, 2015 के नियम 3 और नियम 4 का पालन नहीं किया गया। उन्हें पूर्व में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। याचिकाकर्ता ने अपने कब्जे में प्रशासनिक हस्तक्षेप और संभावित बुलडोजर कार्रवाई से सुरक्षा देने का अनुरोध किया था।

प्रतिकूल निर्णय पर भी सात दिन की कानूनी राहत
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि यदि सक्षम प्राधिकारी का फैसला याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भी आता है, तब भी उस आदेश की सूचना प्राप्त होने के सात दिन तक उसे लागू नहीं किया जाएगा। अदालत के इस निर्णय से याचिकाकर्ताओं को आगे के कानूनी रास्ते अपनाने और उच्च अदालत में जाने का अवसर मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को केवल समय-सीमा के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकेगा।
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नीलामी प्रक्रिया और आगे के कानूनी रास्ते
अधिकारियों के अनुसार यदि सक्षम प्राधिकारी का निर्णय याचिकाकर्ताओं के प्रतिकूल आता है, तो वे सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर कर सकते हैं। मामले में आगे की सभी प्रशासनिक कार्रवाइयां न्यायालय के आदेशों पर ही निर्भर करेंगी। यदि याचिकाकर्ताओं को अदालती स्तर से कोई कानूनी राहत प्राप्त नहीं होती है, तो ऐसी स्थिति में संबंधित शत्रु संपत्तियों को नियमों के तहत नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

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