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Bhopal: एम्स में पहली बार हुई  20 दिन के नवजात की MRI, ब्रेन इंजरी से पीड़ित था नवजात, चिकित्सकों ने बचाई जान

Sun, 01 Jun 2025 05:28 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

एम्स भोपाल में पहली बार मात्र 20 दिन के वनजात की एमआरआई की गई है। ब्रेन से जुड़ी गंभीर समस्या से ग्रसित नवजात की एमआरआई की गई। इसके लिए एक विशेष टीम तैयार की गई, जिसने एनेस्थीसिया की मदद से यह जांच की है। जो 45 मिनट तक चली।
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एम्स में नवजात की एमआरआई करने चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी स्थित एम्स लगातार नवाचार को  बढ़ावा दे रहा है। नए-नए प्रयोग से मरीजों की जटिल बीमारियों का इलाज सरल हो रहा है। इसी कड़ी में एम्स भोपाल में पहली बार मात्र 20 दिन के वनजात की एमआरआई की गई है।दरअसल एमआरआई जांच आमतौर पर एक वयस्क मरीज के लिए डर भरे अनुभव जैसा होता है। मशीन से निकलने वाला तेज शोर और अंदर जाने पर सीमित जगह होने से कई मरीजों को बेचैनी होने लगती है। जो इस जांच को मुश्किल बना देती है। वहीं, यदि नवजात की जांच करनी तो यह लगभग असंभव सा लगता है।ब्रेन से जुड़ी गंभीर समस्या से ग्रसित एक 20 दिन के नवजात की एम्स में एमआरआई की गई। इसके लिए एक विशेष टीम तैयार की गई, जिसने एनेस्थीसिया की मदद से यह जांच की है। जो 45 मिनट तक चली।
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 बेहद जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया
चिकित्सकों ने बताया कि नवजात शिशु की बेहद जटिल एमआरआई प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। जिसने उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है। हाल ही में एम्स भोपाल में एक नवजात शिशु को मस्तिष्क संबंधी गंभीर समस्या की आशंका के चलते रेफर किया गया था। कई जांच होने के बाद भी समस्या की ठीक से पुष्टि नहीं हो पा रही थी।

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नवजात के लिए बेहद खतरनाक
जिसके बाद डॉक्टरों ने शिशु की एमआरआई कराने का फैसला किया। लेकिन, यहां असली चुनौती सामने आई कि एमआरआई मशीन का अत्यधिक तेज शोर और उसका बंद वातावरण किसी भी नवजात के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था। इस उम्र में बच्चे असहज होने पर हिलते डुलते हैं, जिससे जांच खराब हो सकती है या शिशु को नुकसान पहुंच सकता है।

अंतिम विकल्प होता है एमआरआई
एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर नवजातों के मस्तिष्क की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग होता है। यह कई मामलों में कारगर है लेकिन जब गहन मूल्यांकन की आवश्यकता हो तब इससे सटीक जानकारी नहीं मिलती है। ऐसे में एमआरआई ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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ब्रेन इंजरी की हुई पुष्टि
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार एमआरआई रिपोर्ट में ब्रेन इंजरी की पुष्टि हुई। जिसका तत्काल इलाज शुरू किया गया। अब बच्चे की सेहत में सुधार है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
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