केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एमपी के भी पांच शहरों को मॉक ड्रिल के लिए चुना गया था। इनमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और कटनी शामिल हैं। भोपाल में शाम 4 बजे डीबी मॉल में आग से बचाव और लोगों को बाहर निकालने के साथ नूतन कॉलेज में बने अस्थाई अस्पताल पहुंचाने की रिहर्सल की गई। वहीं न्यू मार्केट में भी लोगों को हमले के दौरान सुरक्षित निकलने की रिहर्सल हुई। भोपाल के भेल परिसर में पिपलानी थाने के पीछे भी मॉक ड्रिल की गई। इसमें घायलों का रेस्क्यू किया गया। ड्रिल के दौरान CPR देना भी सिखाया गया। एक नकली हमले की स्थिति में घर में आग लगने का दृश्य दिखाया गया, जहां फायर फाइटर्स ने आग पर काबू पाया और घायलों को सुरक्षित निकाला।
12 मिनट तक शहर में छाया रहा अंधेरा
मॉक ड्रिल के तहत शाम 7.30 बजते ही पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। करीब 12 मिनट तक शहर में अंधेरा छाया रहा। इसके बाद लोगों ने घरों, दुकानों और वाहनों की लाइट ऑन कर दी। पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस-प्रशासन ने ड्रोन कैमरे से वीडियो भी बनाए। साढ़े सात बजे पुलिस ने वाहनों को रोक-रोककर लाइट बंद कराई। शहर में लोगों ने घर के अंदर रहकर ही घरों की बिजली बंद कर दी। अस्पताल परिसर, होटल, मॉल की बिजली भी बंद रही। हालांकि कई लोगों ने अंधेरे की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए अपने मोबाइल चालू किए। पुराने शहर के राजा भोज सेतु पर ट्रैफिक पूरी तरह से रोक दिया गया। गाड़ियों की लाइट के साथ साथ वीआईपी रोड की भी लाइट लगभग बंद हो गई। ताजुल मसाजिद सहित भोपाल के मैदानी इलाके में पूरी तरह से ब्लैकआउट रहा। सभी गाड़ियां लगभग थम गई। रेड अलार्म बजाने के साथ ही ब्लैक आउट का असर बोर्ड ऑफिस चौराहे पर दिखा। इस दौरान लोगों ने गाड़ियों के लाइट को बंद रखा।
मरीजों को लेकर अस्थाई अस्पताल पहुंची एंबुलेंस
डीबी मॉल से मरीजों को लेकर एंबुलेंस नूतन कॉलेज में बनाए गए अस्थाई अस्पताल पहुंची। जहां घायलों का इलाज शुरू किया गया। एक मरीज गंभीर होने पर उसे रेड जोन में शिफ्ट किया गया। अस्थाई अस्पताल में स्वस्थ विभाग द्वारा कुल 110 लोगों का स्टाफ तैनात किया गया है इसमें स्पेशलाइज्ड डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, सपोर्टिंग स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट समेत अन्य शामिल है। मॉक ड्रिल के दौरान कुल 10 एम्बुलेंस लगाई गईं हैं। जिसमें से 5 डीबी मॉल, 3 कोकता बायपास और 2 ईट खेड़ी में में तैनात की गई थी। अस्थाई अस्पताल में मॉक ड्रिल के दौरान एक चूक भी सामनेआई। यहां स्टाप ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर पहुंचा लेकिन मास्क किट भूल गए। जिसके बाद मरीज को दूसरे बेड में इलाज के लिए भर्ती किया गया। हालांकि टीम ने तत्काल गलती सुधारते हुए जेपी अस्पताल से मास्क किट मंगवाई।
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लोगों को जागरूक करना था उद्देश्य
मॉक ड्रिल को लेकर पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने कहा कि इस रिहर्सल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना और उन्हें किसी भी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही बचाव कार्य में काम करने वाली सभी टीमों में आपसी समन्वय और बेहतर तालमेल बन सके ताकि लोगों को उचित समय में मदद मिल सके।
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घायलों को किया रेस्क्यू
इधर भेल परिसर में पिपलानी थाने के पीछे भी मॉक ड्रिल की गई। इसमें घायलों का रेस्क्यू किया गया। शाम 4 बजे से मॉक ड्रिल की शुरुआत कर दी गई। जिला प्रशासन, नगर निगम, होमगार्ड और भेल प्रबंधन की ज्वाइंट मॉक ड्रिल है। इस दौरान घायलों को बिल्डिंग से रेस्क्यू किया गया। इसके बाद उन्हें पिपलानी संजीवनी क्लिनिक एवं कस्तूरबा हॉस्पिटल, हताईखेड़ा अस्पताल ले जाया गया।
मॉक ड्रिल से पहले हुई रिहर्सल
भोपाल के पांच जगह मॉडल ड्रिल की गई इससे पहले पुलिस लाइन नेहरू नगर में आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल की रिहर्सल की गई। इसमें बताया गया कि हमले या आपदा के दौरान कैसे घायलों को प्राथमिक उपचार दिया जाए और उन्हें सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया जाए।