आदमपुर छावनी ने पिछले दिनों लगी आग
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भोपाल शहर की आदमपुर छावनी स्थित कचरा खंती अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य संकट का कारण बनती जा रही है। इस क्षेत्र से जुड़े मामले की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 80 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने एक प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि आदमपुर कचरा खंती में 12 लाख टन कचरे के ढेर और बार-बार लग रही आग की वजह से खंती के एक किलोमीटर के दायरे में भूजल और हवा प्रदूषित हुई है।
7 शहरी गांव में स्वच्छ हवा-पानी तक नहीं मिल पा रहा
उन्होने बताया कि इससे आसपास के सात शहरी गांव के लोगों को स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी तक नहीं मिल पा रहा है। रिपाेर्ट के अनुसार भूजल में आयरन की मात्रा 100 गुना अधिक पाई गई है। यह पानी न केवल पीने के लिए, बल्कि सब्जी और फसलों की सिंचाई के लिए भी खतरनाक हो गया है।
कचरे से निकला जहरीला तरल पदार्थ जमीन में समा रहा
रिपोर्ट के अनुसार कचरा खंती के एक किलोमीटर के दायरे में भूजल बुरी तरह प्रदूषित हो गया है। लीचेट यानी सड़ते कचरे से निकला जहरीला तरल पदार्थ जमीन में समा रहा है और आसपास के सात शहरी गांवों का पानी दूषित कर रहा है। डॉ. पांडे का कहना है कि यह स्थिति नगर निगम की लापरवाही का नतीजा है। खंती में बार-बार लग रही आग को लेकर मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद जुलाई 2023 में एनजीटी ने नगर निगम पर 1.80 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए निगम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
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कचरे का नहीं हो रहा वैज्ञानिक निष्पादन
रिपोर्ट के अनुसार आदमपुर कचरा खंती में करीब 10 से 12 लाख टन कचरा जमा है। प्रतिदिन भोपाल से निकलने वाले 850 टन कचरे में से लगभग 800 टन कचरा खंती पहुंचता है, लेकिन नगर निगम के पास केवल 420 टन कचरे के निष्पादन की ही क्षमता है, जिससे बाकी कचरा सीधे डंप हो रहा है। यही कचरा बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के जमा होकर ज़मीन को प्रदूषित कर रहा है।
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15 माह में 18 बार आग, आग की घटनाएं भी नहीं दर्ज
डॉ. पांडे ने बताया कि पिछले 15 माह में आग की कुल 18 घटनाएं हुईं हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई घटनाएं निगम ने दर्ज ही नहीं कीं। इससे स्पष्ट है कि निगम की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से विफल रही है। सीपीसीबी की रिपोर्ट बताती है कि निगम के पास 3.5 लाख लीटर का पानी टैंक, फायर फाइटिंग वाहन और बोरवेल हैं, लेकिन 2022 में सीपीसीबी द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस के अधिकांश प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। आग की रोकथाम के लिए पर्याप्त निगरानी, गैस डिटेक्टर और तापमान रिकार्डिंग की व्यवस्था भी नहीं है।