भोपाल मध्य विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई है। फर्जी सेल डीड के सहारे कई साल से प्रियदर्शनी कॉलेज चलने के मामले में आरिफ मसूद के खिलाफ हाईकोर्ट ने 3 दिन में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही डीजीपी कैलाश मकवाना को एसआईटी गठित करने का निर्देश भी दिया गया है। एडीजी कम्युनिकेशन संजीव शमी इस SIT के प्रमुख होंगे और तीन सदस्यीय SIT के अन्य दो सदस्यों को संजीव शमी करेंगे सिलेक्ट।
दो बार फर्जी सेल डीड लगाई
अमन एजुकेशन सोसाइटी के सेक्रेटरी रहते हुए आरिफ मसूद ने दो बार फर्जी सेल डीड लगाई थी। साल 2004 और 2005 के बीच किए गए इस फर्जी वाले पर 20 साल तक किसी की नजर नहीं पड़ी और आखिरकार सब रजिस्टार परी बाजार भोपाल की रिपोर्ट के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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20 साल तक किसी ने जचने की जरूरत नहीं समझी
हाई कोर्ट में जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिविजनल बेंच ने इस मामले में कहा कि फर्जी सेल डीड दिए जाने के बाद भी आरिफ मसूद के पॉलीटिकल कनेक्रांस ऐसे थे कि सरकार ने उसे दोबारा सही शेल्डेड जमा करने का मौका दिया। उसके बाद दोबारा जमा की गई सेल डीड को 20 साल तक किसी ने जचने की जरूरत नहीं समझी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि अमन एजुकेशनल सोसाइटी के सेक्रेटरी आरिफ मसूद सहित उन सभी जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाए जिनमें कोई न एक्शन लेने के कारण यह फर्जीवाड़ा लगातार चलता रहा।
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कार्रवाई की जगह दोबारा सेल डीड जमा करने का दिया मौका
प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता के लिए पहली सेल डीड जो जाम की थी वह 2 अगस्त 1999 की थी। कोर्ट ने यहां पाया कि यह सेल डीड फर्जी थी क्योंकि खसरा नंबर 26 जिसका क्षेत्रफल 2.83 एकड़ है। उसमें खरीदार अमन एजुकेशन सोसाइटी के सेक्रेटरी आरिफ मसूद को दिखाया गया था जबकि इसकी असली सेल लीड में खरीदार आरिफ मसूद की पत्नी रुबीना मसूद थी। फर्जीवाड़ा करने के बाद भी कार्रवाई करने की जगह सरकार ने उसे दोबारा से सेल डीड जमा करने का मौका दिया। आरिफ मसूद ने कॉलेज की मान्यता के लिए दोबारा एक दस्तावेज जमा किया जिसमें दिखाया गया था कि 7 नवंबर 1999 को विलेज कोहेफिजा में आरिफ मसूद ने खसरा नंबर 26 को राबिया सुल्तान से खरीदा था। 2004 में दोबारा जमा की गई इस सेल डीड की लगभग 20 साल तक किसी ने जांच ही नहीं की और इसी दस्तावेज के सहारे आरिफ मसूद का कॉलेज बे रोकटोक चलता रहा।