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Bhopal:बीएमएचआरसी और IISER मानसिक बीमारियों पर करेंगे रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का होगा उपयोग

Tue, 22 Apr 2025 07:42 AM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

Research: भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी), भोपाल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) साथ मिल कर मानसिक बीमारियों पर रिसर्च करेंगे। इसे लेकर दोनो संस्थानों ने समझौता (एमओयू) किया है।
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BMHRC - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी), भोपाल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) साथ मिल कर मानसिक बीमारियों पर रिसर्च करेंगे। इसे लेकर दोनो संस्थानों ने समझौता (एमओयू) किया है। अधिकारियों का कहना है कि भोपाल में अनुसंधान और प्रयोगात्मक कार्यक्रमों में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हुआ है। आईआईएसईआर में बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव और आईआईएसईआर के निदेशक प्रोफेसर गोबर्धन दास ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। 
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एआई को जोड़कर मरीजों की देखभाल को करेंगे बेहतर
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि इस साझेदारी के तहत, बीएमएचआरसी और आईआईएसईआर मिलकर ऐसे शोध अवसरों की पहचान करेंगे, जिन पर साथ काम किया जा सके। इनमें एक प्रमुख विषय होगा मानसिक बीमारियों की पहचान और इलाज की योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग बढ़ाना। इसके अलावा, मेडिकल इमेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स (EHRs) के साथ एआई को जोड़कर मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के प्रयास भी शामिल होंगे।


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राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से फंडिंग की करेंगे मांग
उन्होंने बताया कि दोनों संस्थान अपने वैज्ञानिकों और फैकल्टी सदस्यों को प्रेरित करेंगे कि वे संयुक्त रूप से प्रमुख शोध क्षेत्रों में प्रपोजल तैयार करें और उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को फंडिंग के लिए भेजें। संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को केवल दोनों संस्थानों की स्पष्ट स्वीकृति के बाद ही संबंधित फंडिंग एजेंसियों को भेजा जाएगा। साथ ही, प्रकाशन और पेटेंट से संबंधित फंडिंग एजेंसियों के दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा, या जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाएगा। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि यह समझौता तकनीक और चिकित्सा के क्षेत्र में एक मजबूत साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगा।
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