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भोपाल: आयुष्मान में फर्जी डॉक्टरों का खेल! 45 के नाम चढ़ाए, असल में सिर्फ 15 कार्यरत; एक ही नाम चार-चार बार

Mon, 05 Oct 2026 06:22 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने के लिए भोपाल के सृिष्ट हॉस्पिटल ने पोर्टल पर 45 स्टाफ एंट्री कीं, लेकिन जांच में अलग-अलग नाम करीब 15 ही मिले। कई नाम चार-चार बार दर्ज थे, जबकि पैथोलॉजिस्ट के नाम और कथित फर्जी हस्ताक्षर वाली रिपोर्टों के आधार पर मरीजों का इलाज दिखाने का मामला भी सामने आया।
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ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आयुष्मान भारत योजना में अस्पतालों को सूचीबद्ध कराने के लिए स्टाफ की फर्जी संख्या दिखाने का मामला सामने आया है। राजधानी के करोंद स्थित सृष्टि हॉस्पिटल की जांच में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने पाया कि अस्पताल ने ऑनलाइन पोर्टल पर 45 डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की एंट्री दिखाई, लेकिन इनमें अलग-अलग नाम करीब 15 ही थे। कई नामों को चार-चार बार दोहराकर अस्पताल ने अपनी स्टाफ क्षमता वास्तविक संख्या से कहीं अधिक बताई। जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। पोर्टल पर दर्ज सभी 45 एंट्री के सामने एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था। यह नंबर अस्पताल संचालक राजकुमार सूर्यवंशी का बताया गया है। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन से इन कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन और उपस्थिति से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन इन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जांच में स्टाफ सूची में एक महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम चार बार दर्ज मिला। संबंधित डॉक्टर ने जांच में स्पष्ट किया कि उन्होंने सृिष्ट हॉस्पिटल में कभी काम नहीं किया। उन्होंने न तो अस्पताल को अपने दस्तावेज दिए और न ही अपने नाम के इस्तेमाल की अनुमति दी। डॉक्टर के मुताबिक, नाम हटाने के लिए कहने के बावजूद उसे अस्पताल की सूची में बनाए रखा गया। जांच में संबंधित डॉक्टर के दूसरे संस्थान में कार्यरत होने की जानकारी भी सामने आई। 
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पैथोलॉजिस्ट के नाम पर रिपोर्ट, हस्ताक्षर डॉक्टर के नहीं
मामले में सबसे गंभीर गड़बड़ी पैथोलॉजी रिपोर्ट को लेकर सामने आई। अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी के नाम से जारी रिपोर्टों पर एक एमडी पैथोलॉजिस्ट का नाम, मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर और सील इस्तेमाल की गई थी। हालांकि, संबंधित डॉक्टर ने जांच के दौरान इन रिपोर्टों पर किए गए हस्ताक्षर को अपना मानने से इनकार किया। डॉक्टर ने बताया कि रिपोर्ट पर मौजूद हस्ताक्षर उनके वास्तविक हस्ताक्षर से अलग हैं। यानी जांच एजेंसी के सामने ऐसे दस्तावेज आए, जिनमें डॉक्टर का नाम और सील इस्तेमाल होने के बावजूद हस्ताक्षर को डॉक्टर ने अपना नहीं माना। 
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अस्पताल में पैथोलॉजी लैब की अनुमति का भी सवाल
जांच में जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड भी खंगाले गए। इनमें सृष्टि हॉस्पिटल में पैथोलॉजी लैब संचालित करने की अनुमति दर्ज नहीं मिली। इसके बावजूद अस्पताल से पैथोलॉजी विभाग के नाम पर जांच रिपोर्ट जारी होने का मामला सामने आया। जांच एजेंसी ने ऐसी कई रिपोर्टों को भी देखा, जिन पर विवादित हस्ताक्षर थे और जिन मरीजों का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत दिखाया गया था। अस्पताल संचालक ने अपने लिखित जवाब में इन मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत भर्ती किए जाने की बात स्वीकार की। 

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2025 में 709 मरीजों का इलाज दर्ज
आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2025 में सृष्टि हॉस्पिटल में 709 हितग्राहियों के इलाज का रिकॉर्ड दर्ज है। ऐसे में फर्जी स्टाफ और संदिग्ध पैथोलॉजी रिपोर्ट के जरिए कितने मरीजों का इलाज दिखाया गया और इनके आधार पर शासन से कितना भुगतान लिया गया, इसकी जांच अब महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन से बार-बार डॉक्टरों की नियुक्ति, वेतन, उपस्थिति, पैथोलॉजी संचालन की अनुमति और मरीजों की इलाज संबंधी फाइलें मांगी गईं। जांच एजेंसी के मुताबिक, अस्पताल प्रबंधन इन दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं कर सका। 

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2023 में आयुष्मान से जुड़ा था सृष्टि अस्पताल
जांच में सामने आया कि सृष्टि हॉस्पिटल वर्ष 2023 में आयुष्मान भारत योजना में सूचीबद्ध हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए अस्पताल को अपने डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होता है। इसी स्टाफ क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अस्पताल की पात्रता का आकलन किया जाता है। जांच में स्टाफ की 45 एंट्री और वास्तविक नामों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि अस्पताल की सूचीबद्धता के समय इन विवरणों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ।

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अब ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया केस
इन जांच निष्कर्षों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने 5 अक्तूबर 2026 को सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच का अगला फोकस आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल को हुए भुगतान पर है। कितनी राशि का भुगतान हुआ, किन मरीजों के इलाज के आधार पर क्लेम किए गए और इस पूरी प्रक्रिया में अस्पताल के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
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