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Bhopal: हमीदिया में पहली बार हुआ एबीओ-इनकंपैटिबल किडनी प्रत्यारोपण,ऐसा करने वाला प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल

Wed, 30 Jul 2025 07:29 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

हमीदिया अस्पताल में पहला एबीओ-इनकंपैटिबल किडनी प्रत्यारोपण किया है, जो कि प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल का पहला ऐसा प्रत्यारोपण है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  इससे गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए आधुनिक उपचार के नए रास्ते खुलेंगे।
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प्रत्यारोपण करती चिकित्सकों की टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के गांधी मेडिकल कॉलेज के हमीदिया अस्पताल में पहला एबीओ-इनकंपैटिबल (रक्त समूह असंगत) किडनी प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो कि प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल का पहला ऐसा प्रत्यारोपण है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि एबीओ-इनकंपैटिबल (रक्त समूह असंगत) किडनी प्रत्यारोपण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दाता और प्राप्तकर्ता का रक्त समूह मेल नहीं खाता है। इस प्रत्यारोपण में, दो रोगियों के बीच गुर्दे की अदला-बदली की जाती है, ताकि दोनों को संगत रक्त समूह वाले दाता मिल सकें। यह प्रत्यारोपण हमीदिया अस्पताल के लिए एक बड़ी सफलता है और इससे गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए आधुनिक उपचार के नए रास्ते खुलेंगे। बतादें कि यह किडनी प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री में किया गया।
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एबीओ-इनकंपैटिबल किडनी प्रत्यारोपण क्या है?
 यह एक किडनी प्रत्यारोपण है जिसमें दाता और प्राप्तकर्ता का रक्त समूह मेल नहीं खाता। प्राप्तकर्ता के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी, जो दाता के रक्त समूह के प्रति विशिष्ट होती हैं, प्रत्यारोपित किडनी को अस्वीकार कर सकती है।इसलिए, एबीओ-असंगत प्रत्यारोपण में, प्राप्तकर्ता को प्रत्यारोपण से पहले और बाद में विशेष उपचार दिया जाता है ताकि एंटीबॉडी के स्तर को कम किया जा सके और अस्वीकृति के जोखिम को कम किया जा सके।

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 2 साल पहले किडनी रोग का चला था पता
मरीज मनुज कुमार (बदला हुआ नाम) 43 वर्षीय पुरुष हैं और उन को 41 वर्ष की उनकी पत्नी कमला (बदला हुआ नाम) द्वारा दान किया गया किडनी का प्रत्यारोपण किया गया है। रोगी को 2 साल पहले किडनी रोग का पता चला था जब उनका हाइपरटेंशन के लिए इलाज चल रहा था, उनको आगे की जांच-पड़ताल में किडनी की गंभीर बीमारी का पता चला। इलाज के दौरान किडनी की खराबी बढ़ते चली गई और 6 महा पहले उनका डायलिसिस शुरू करवाना पड़ा।

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पत्नी ने दिया दूसरा जीवन
मरीज़ निमच का रहने वाले हैं वे इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल आए थे। इलाज के दौरान मरीज़ ने गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए इच्छा जताई, परंतु डोनर के रूप में उनकी पत्नी ही उपलब्ध थी। मरीज़ के जीवन को बचाने के लिए हमीदिया की किडनी प्रत्यारोपण यूनिट ने पहली ABOI गुर्दा प्रत्यारोपण करने की योजना बनाई। मरीज़ और उनके परिवार ने सहमति जताई, इसके बाद तैयारी की गई और उनकी पत्नी ने उन्हें अपनी एक किडनी दानकर पुनः नया जीवन दिया।
 
 
ट्रांसप्लांट टीम में शामिल चिकित्सक
किडनी रोग विशेषज्ञ- डॉ. हिमांशु शर्मा, डॉ. आर.आर बर्ड
प्रत्यारोपण सर्जन- डॉ. सौरभ जैन, डॉ. समीर व्यास,डॉ. अमित जैन, डॉ. नरेंद्र कुर्मी
निश्चतना विशेषज्ञ- डॉ. आरपी कौशल, डॉ. उर्मिला केसरी, डॉ. बृजेश कौशल,डॉ. असीम,डॉ. श्वेता श्रीवास्सुव,डॉ. शिवासमय, डॉ.दीपक डॉ. पायल, डॉ. रीनु, डॉ. शुस्मीता, डॉ. राशिका, डॉ. श्रावणी
जूनियर डॉक्टर- डॉ. सौरभ डॉ. अजय, डॉ. अभिषेक, डॉ. शिवम, डॉ. शुभम
 
 
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