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Bhopal:तीसरी तक के 38 फीसदी स्कूली बच्चों को नहीं आती गिनती, 10% को नहीं है अक्षर ज्ञान,असर रिपोर्ट में खुलासा

Thu, 30 Jan 2025 08:44 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

एमपी के स्कूलों में पढ़ने वाले तीसरी कक्षा तक 35 फ़ीसदी बच्चों को 100 तक गिनती नहीं आती है। 10 फीसदी बच्चों को अक्षर ज्ञान ही नहीं है। यह खुलासा एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) की ओर से जारी शिक्षा की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है।
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स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में शिक्षा स्तर को बढ़ाने का लगातार सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन स्कूलों की स्थिति में अभी तक सुधार नहीं हुआ है। हालत यह है कि मध्य प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले तीसरी कक्षा तक के 35 फ़ीसदी बच्चों को 100 तक गिनती नहीं आती है। जबकि 10 फीसदी से ज्यादा ऐसे बच्चे हैं जिनको अक्षर ज्ञान ही नहीं है। यह खुलासा एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) की ओर से जारी शिक्षा की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है। यह सर्वे प्रदेश के 50 जिलों के सरकारी व निजी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों पर किया गया है। हालांकि बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति अभिभावकों में रुचि बढ़ी है। सात साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो नामांकन का दर बढ़ा है। 2024 में प्री-स्कूल में तीन साल के 90.5 फीसदी, चार साल के 88.7 फीसदी और पांच साल के 66.7 फीसदी बच्चों ने प्रवेश लिया है।
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नई शिक्षा नीति लागू करने वाला पहला प्रदेश है मध्य प्रदेश
 मध्य प्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला पहला राज्य बना है, लेकिन बच्चों की स्थिति यह बनी हुई है। मप्र में सरकारी स्कूलों के बच्चे ठीक तरह से अक्षर तक नहीं पहचान पा रहे हैं। इस बात का खुलासा होने के बाद से ही सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग के सर्वे रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद यह खुलासा हुआ है। सर्वे रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रदेश की स्कूली शिक्षा की पोल खुल गई है। इस सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों के मुकाबले निजी स्कूलों के बच्चों की सीखने की क्षमता में वृद्धि हुई है। 

यह है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार कक्षा 3 में, 10.3% बच्चे अक्षर भी नहीं पढ़ सकते, 35.5% बच्चे अक्षर पढ़ सकते हैं पर शब्द या उससे अधिक नहीं, 19.4% बच्चे शब्द पढ़ सकते हैं पर कक्षा स्तर का पाठ या उससे अधिक नहीं, 16.1% बच्चे कक्षा। स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं पर कक्षा 2 स्तर का पाठ नहीं, और 18.8% बच्चे कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं।
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डिजिटल साक्षरता और आधारभूत सुविधाओं में सुधार
राज्य में डिजिटल शिक्षा को लेकर भी सकारात्मक रुझान मिले हैं। वर्ष 14-16 आयु वर्ग के 87% बालकों के घरों में स्मार्टफोन हैं और 80% बच्चों को स्मार्टफोन के उपयोग का ज्ञान है। साथ ही, वर्ष 2022 से वर्ष 2024 के बीच विद्यालयों में मध्याह्न भोजन, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

16 प्रतिशत छात्राएं और 12% छात्रों का स्कूलों में नहीं हुआ प्रवेश
इस रिपोर्ट के अनुसार 2024 में 15 से 16 वर्ष के 16 प्रतिशत छात्राएं व 12 प्रतिशत छात्रों का स्कूलों में प्रवेश नहीं हुआ है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले आठ सालों में कम हुआ है। 2022 में 12 फीसदी बालक और 17 फीसदी बालिकाओं का स्कूलों में नामांकन नहीं हुआ है। कोविड से पहले यह आंकड़ा और अधिक था। इस सर्वे में स्कूल में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का भी आकलन किया गया है। इसमें पिछले सालों के मुकाबले कुछ सुधार हुआ है। 58 फीसदी स्कूलों के कन्या शौचालय उपयोग के लायक है तो 70 फीसदी स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध है। 91 फीसदी स्कूलों में मध्याह्न भोजन दिया जाता है, वहीं 90 फीसदी स्कूलों में बिजली कनेक्शन है।
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