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बच्चों का गणित से ऐसे भगाया डर: सीलिंग, रेलवे और क्रिकेट को बना दिया क्लासरूम, संगीता को मिला राष्ट्रीय सम्मान

Sat, 26 Sep 2026 11:21 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 से सम्मानित भोपाल की गणित शिक्षिका संगीता यादव ने गणित को किताबों से निकालकर मास्टर प्लान, रेलवे, क्रिकेट, खेल और कला से जोड़ा। अब उनका लक्ष्य एआई की मदद से शिक्षकों को प्रशिक्षित कर बच्चों के मन से गणित का डर खत्म करना है।
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राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 भोपाल की गणित शिक्षिका संगीता यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गणित का नाम सुनते ही कई बच्चों के सामने कठिन सवाल, फॉर्मूले और परीक्षा का डर खड़ा हो जाता है। भोपाल की गणित शिक्षिका संगीता यादव ने इसी डर को अपनी पढ़ाने की शैली से चुनौती दी। उन्होंने गणित को किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित रखने के बजाय बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ दिया। अब राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने के बाद उनका अगला लक्ष्य एआई की मदद से शिक्षकों को प्रशिक्षित करना और बच्चों के मन से गणित का डर दूर करना है। संगीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 से सीबीएसई श्रेणी में सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात को वे अपने लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी मानती हैं। उनका कहना है कि अब प्रयास यह होना चाहिए कि गणित बच्चों को रटने वाला विषय नहीं, बल्कि समझने और जीवन में इस्तेमाल करने वाला विषय लगे।
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सीलिंग से प्रतिशत और रेलवे से एलसीएम
संगीता बच्चों को गणित के सवाल सीधे किताब से समझाने के बजाय उनके आसपास मौजूद परिस्थितियों को उदाहरण बनाती हैं। मध्य प्रदेश में मास्टर प्लान और सीलिंग से जुड़ी चर्चा को भी वे गणित से जोड़ती हैं।उनके अनुसार बच्चों से एक काल्पनिक मास्टर प्लान बनवाकर उसमें आवासीय, व्यावसायिक और अस्पताल जैसे अलग-अलग हिस्से तय कराए जा सकते हैं। इसके बाद पूछा जा सकता है कि कुल क्षेत्रफल में किस हिस्से का कितना प्रतिशत है। इस तरह प्रतिशत का सवाल किताब से निकलकर वास्तविक स्थिति से जुड़ जाता है। इसी तरह रेलवे के उदाहरण से एलसीएम समझाया जा सकता है। अलग-अलग ट्रेनें अलग-अलग समय पर स्टेशन पर आती हैं। बच्चों से पूछा जाता है कि दोनों या कई ट्रेनें दोबारा एक साथ कब आएंगी। इसी प्रक्रिया में वे समय के दोहराव को समझते हुए एलसीएम तक पहुंचते हैं।

क्रिकेट और फुटबॉल के आंकड़ों में खोजती हैं गणित
संगीता के लिए गणित केवल जोड़-घटाव और सूत्रों का विषय नहीं है। उनका मानना है कि सुबह उठने से लेकर रात तक की जिंदगी में गणित किसी न किसी रूप में मौजूद रहता है। क्रिकेट या फुटबॉल मैच के आंकड़ों से सांख्यिकी समझाई जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को समय के साथ जोड़कर टाइम सीरीज समझाई जा सकती है। भूगोल और अर्थशास्त्र के साथ गणित को जोड़ने से बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि वे जो पढ़ रहे हैं, उसका वास्तविक जीवन में इस्तेमाल कहां होता है। उनका जोर इस बात पर रहता है कि बच्चों को केवल यह न बताया जाए कि क्या पढ़ना है, बल्कि यह भी समझाया जाए कि क्यों और कैसे पढ़ना है।
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गणित क्विज से शुरू हुआ सफर, डांस और खेल तक पहुंचा
गणित को रोचक बनाने का उनका प्रयास वर्ष 2012 से जारी है। शुरुआत गणित क्विज से हुई। इसके बाद भोपाल में तीन दिन का गणित उत्सव आयोजित किया गया, जिसमें गणित के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।गणित को कला से जोड़ने के लिए प्राचीन गणित पर आधारित बैले भी प्रस्तुत किया गया। इसमें श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों को भी मंच पर शामिल किया गया। इसके बाद गणित को खेल से जोड़ने के लिए टीटी नगर स्टेडियम में मैथमेटिकल रिले जैसी गतिविधि कराई गई। इस तरह गणित ब्लैकबोर्ड पर लिखे सवालों से आगे बढ़कर कला, डांस और खेल का हिस्सा बना।

अब एआई से शिक्षकों को देंगी नई दिशा
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने के बाद संगीता का अगला मिशन एआई के जरिए गणित शिक्षण को ज्यादा प्रभावी बनाना है। उनका मानना है कि तकनीक की मदद से शिक्षकों को ऐसे तरीके सिखाए जा सकते हैं, जिनसे बच्चों को उनकी क्षमता और रुचि के अनुसार गणित समझाया जा सके। एक कक्षा में 40 बच्चे हों तो सभी की सीखने की गति एक जैसी नहीं होती। कोई बच्चा जल्दी समझता है तो किसी को उसी अवधारणा को समझने में ज्यादा समय लगता है। ऐसे में बच्चों की क्षमता और रुचि पहचानकर उनके स्तर के अनुसार उदाहरण देना जरूरी है। संगीता एआई के माध्यम से शिक्षकों को इसी तरह के नए तरीके अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना चाहती हैं।

जिसे खेल पसंद, उसे खेल से समझाएं गणित
संगीता के मुताबिक गणित पढ़ाने से पहले बच्चे की रुचि समझना जरूरी है। जिस बच्चे को खेल पसंद है, उसे खेल के उदाहरण से गणित समझाया जा सकता है। जिसे चित्रकारी पसंद है, उसे ज्योमेट्री चित्रों के जरिए समझाई जा सकती है। गुजरात के अटल ब्रिज का उदाहरण देते हुए वे बताती हैं कि बच्चों से पूछा जा सकता है कि पुल की संरचना में खास आकृतियों का इस्तेमाल क्यों किया गया। आयत की जगह दूसरी आकृति क्यों चुनी गई? ऐसे सवाल बच्चों के भीतर जिज्ञासा पैदा करते हैं और वे खुद जवाब खोजने लगते हैं।

पहले बच्चे के मन से निकालना होगा ‘मैं नहीं कर सकता’
संगीता मानती हैं कि गणित का डर खत्म करने की शुरुआत बच्चे के माइंडसेट से होती है। बच्चे को सबसे पहले यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि मैं कर सकता हूं। उन्होंने ऐसे विद्यार्थियों के साथ भी काम किया है जो अभिभावकों के दबाव में गणित लेते हैं, लेकिन विषय में उनकी रुचि नहीं होती। बातचीत, छोटे-छोटे अभ्यास और बच्चे की रुचि के मुताबिक उदाहरण देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया गया।
उनके अनुसार एक बच्ची लगातार निराश हो रही थी। बातचीत और गणित पढ़ाने का तरीका बदलने के बाद धीरे-धीरे उसका डर कम हुआ और वह आगे सफल हुई। एक विशेष जरूरत वाली छात्रा का उदाहरण देते हुए वे बताती हैं कि वह आज अमेरिका के वाशिंगटन में काम कर रही है।

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सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान संगीता यादव के लिए मंजिल नहीं, बल्कि आगे के काम की शुरुआत है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात के अनुभव को वे अपने जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव मानती हैं। उनके मुताबिक सम्मान जितना बड़ा है, उसके बाद की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। उनका लक्ष्य साफ है गणित को रटने का नहीं, समझने और जिंदगी में इस्तेमाल करने का विषय बनाना। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी नए तरीकों से गणित पढ़ाने के लिए तैयार करना इसी मिशन का अगला कदम है।

 
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