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भोपाल एम्स: अमृत की खरीदी में हेराफेरी का शक, आरटीआई में पूछा 'खेत' का सवाल तो जवाब दिया 'खलिहान' का

Fri, 02 Oct 2026 05:01 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

एम्स भोपाल में अमृत फार्मेसी से दवाओं की सरकारी खरीदी से जुड़ी जानकारी आरटीआई में मांगने पर गलत और दूसरे सप्लायरों के दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।
जानकारी में देरी और करीब चार हजार रुपये शुल्क लिए जाने के बाद भी मांगे गए रिकॉर्ड नहीं मिलने से अमृत की खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
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भोपाल एम्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एम्स भोपाल में अमृत फार्मेसी के अंतर्गत दवाओं की खरीदी में हेराफेरी का शक है। दवाओं की सरकारी खरीदी से जुड़ी जानकारी जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई तो अनुपयुक्त और गलत जानकारी दी गई। एक आरटीआई आवेदन पर पहले जानकारी देने में देरी की गई और बाद में जब दस्तावेज उपलब्ध कराए गए तो उनमें अमृत फार्मेसी की खरीदी के रिकॉर्ड के बजाय दूसरे सप्लायरों के कागज थमा दिए गए। इससे एम्स में दवाओं रूपी अमृत की सरकारी खरीदी की प्रक्रिया को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं और शक गहरा रहा है। बता दें, अमृत फार्मेसी के जरिए मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की योजना देशभर में चल रही है। हालांकि, योजना के तहत सरकारी संस्थानों को दवाओं और कंज्यूमेबल की सप्लाई से जुड़ी खरीद को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी सिलसिले में एम्स भोपाल के सेंट्रल स्टोर और सेंट्रल फार्मेसी के लिए अमृत फार्मेसी से की गई खरीदी की प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड आरटीआई के जरिए मांगे गए थे।
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अमृत से खरीदी के पूरे रिकॉर्ड मांगे थे
आरटीआई में अमृत फार्मेसी से सेंट्रल स्टोर और सेंट्रल फार्मेसी के लिए खरीदी से संबंधित सभी कोटेशन मांगे गए थे। इनमें आमंत्रित और जमा किए गए कोटेशन, उनकी तुलना के लिए तैयार किए गए कंपेरेटिव स्टेटमेंट और अमृत फार्मेसी के साथ हुआ पत्राचार शामिल था। इसके अलावा कोटेशन प्रक्रिया से जुड़े नोटशीट, पत्र, ई-मेल, आंतरिक संचार और अन्य संबंधित फाइल व दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई थीं। यानी आरटीआई का मकसद यह जानना था कि अमृत से खरीदी के लिए कोटेशन कैसे मंगाए गए, किस-किस दर पर प्रस्ताव मिले, उनकी तुलना किस आधार पर की गई और खरीद को मंजूरी देने की प्रक्रिया क्या रही। 
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पहले जानकारी नहीं मिली, बाद में दूसरे सप्लायरों के दस्तावेज दे दिए
एम्स में निर्धारित समय में पूरी जानकारी नहीं मिलने पर प्रथम अपील की गई। इसके बाद करीब दो हजार पन्नों के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए करीब चार हजार रुपये जमा कराए गए। हद तो यह है कि राशि जमा करने और लंबे इंतजार के बाद जो दस्तावेज मिले, उनमें अमृत फार्मेसी से संबंधित रिकॉर्ड के बजाय दूसरे सप्लायरों की खरीदी से जुड़े कागज दे दिए गए। अब सवाल यह उठ रहा है कि अमृत फार्मेसी से संबंधित दस्तावेज आखिर क्यों छिपाए जा रहे हैं? 

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नि:शुल्क जानकारी के वसूले रुपये
पहले लोक सूचना अधिकारी और डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (डिप्टी एमएस)  मयंक दीक्षित ने अधिक कागज होने की बात कहकर आवेदक को अपने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने गुमराह करने का प्रयास किया। वरिष्ठों के निर्देश के बाद भी जानकारी देने में टालमटोल की जाती रही। इसके बाद जब प्रथम अपील की गई तो डिप्टी डायरेक्टर के जानकारी देने के निर्देश के बावजूद इंस्पेक्शन कराने के बहाने जानकारी देने में फिर टालमटोल की गई। इसके बाद भी मांगी गई जानकारी के बजाय दूसरे दवा सप्लायरों के दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। नियमानुसार, निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर मांगी गई जानकारी नि:शुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऐसे में प्रथम अपील के बाद सूचना उपलब्ध कराने के लिए करीब चार हजार रुपये शुल्क लिए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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2023 की अमृत बैठक के मिनट्स भी नहीं मिले
एक अन्य आरटीआई में वर्ष 2023 में अमृत फार्मेसी को लेकर हुई बैठक के मिनट्स और संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए थे। यह जानकारी भी दो माह से ज्यादा समय बीतने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराई गई। इसको लेकर लोक सूचना अधिकारी मयंक दीक्षित की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, जानकारी के अनुसार, संबंधित अवधि में उनके पास वित्त अधिकारी का दायित्व भी था और अमृत फार्मेसी से खरीदी से जुड़ी फाइल के अनुमोदन में उनके भी हस्ताक्षर और सहमति थी। सवाल यह है कि अमृत फार्मेसी से सरकारी खरीदी को किस नियम और प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई थी। यदि इस संबंध में नोटशीट और बैठक के रिकॉर्ड मौजूद हैं तो आरटीआई में उनकी प्रमाणित प्रतियां क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं? 

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लोक सूचना अधिकारी ने साधी चुप्पी
इस मामले में भोपाल एम्स के लोक सूचना अधिकारी और डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (डिप्टी एमएस) मयंक दीक्षित से उनका पक्ष जानने के लिए मैसेज और कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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