'क्या आप मनचाही संस्थान प्राप्त करना चाहते हैं', 'क्या आप गर्भ में ही लिखना चाहते हैं शिशु के भविष्य की इबारत'। कुछ ऐसा ही दावा है भोपाल के एक विश्वविद्यालय का।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार भोपाल का अटल बिहारी वापजेयी विश्वविद्यालय कुछ इसी तरह लोगों को अपनी ओर आकृषित करता है।
विश्वविद्यालय के गर्भ संस्कार तपोवन केन्द्र में गर्भ में पल रहे बच्चों में संस्कारों को बढ़ावा देने और उन्हें प्रतिभावान बनाने के लिए खास सत्र चलाया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की पंफलेट पर आगामी सत्र में चलने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी दी गई है। जिसमें बताया गया है कि हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से दो संस्कार गर्भ संस्कार और पुणसवन्ना संस्कार से गर्भ में पलने वाले शिशुओं को परिचित कराया जाएगा, जिससे जीवनभर उनका असर रह सके।
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शिशु को गर्भ में ही दी जाती है संस्कारों की शिक्षा
'क्या आप मनचाही संस्थान प्राप्त करना चाहते हैं', 'क्या आप गर्भ में ही लिखना चाहते हैं शिशु के भविष्य की इबारत'। कुछ ऐसा ही दावा है भोपाल के एक विश्वविद्यालय का।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार भोपाल का अटल बिहारी वापजेयी विश्वविद्यालय कुछ इसी तरह लोगों को अपनी ओर आकृषित करता है।
विश्वविद्यालय के गर्भ संस्कार तपोवन केन्द्र में गर्भ में पल रहे बच्चों में संस्कारों को बढ़ावा देने और उन्हें प्रतिभावान बनाने के लिए खास सत्र चलाया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की पंफलेट पर आगामी सत्र में चलने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी दी गई है। जिसमें बताया गया है कि हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से दो संस्कार गर्भ संस्कार और पुणसवन्ना संस्कार से गर्भ में पलने वाले शिशुओं को परिचित कराया जाएगा, जिससे जीवनभर उनका असर रह सके।
गर्भवती महिलाओं के जरिए शिशुओं तक पहुंचाए जाते हैं संस्कार
शनिवार को सम्मेलन के पहले दिन यहां आने वाले जोडों को गर्भ संस्कार की जानकारी दी जाएगी जबकि दूसरे दिन पुणसवन्ना संस्कार बतलाया जाएगा।
धर्म पर शोध करने वालों के अनुसार गर्भ संस्कार माता पिता के लिए होता है जो एक स्वस्थ बच्चे के लिए पूजा और प्रार्थना करते हैं। जबकि पुणसवन्ना संस्कार शुरू होता है गर्भ के तीसरे और चौथे महीने में। जब एक पुजारी बच्चे में दिव्य गुणों के आह्वान के लिए पूजन और वैदिक भजनों का पाठ करता है।
विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य पढ़ाने वाली और इस केन्द्र की समन्वयक डा. रेखा राय बताती हैं कि बीते अक्टूबर से यह केन्द्र संचालित किया जा रहा है। जिसमें गर्भवती महिलाएं गर्भ में पलने वाले बच्चों को हिंदू धर्म के सभी 16 संस्कारों से परिचित कराना चाहती हैं।
गर्भवती महिलाओं के जरिए शिशुओं तक पहुंचाए जाते हैं संस्कार
शनिवार को सम्मेलन के पहले दिन यहां आने वाले जोडों को गर्भ संस्कार की जानकारी दी जाएगी जबकि दूसरे दिन पुणसवन्ना संस्कार बतलाया जाएगा।
धर्म पर शोध करने वालों के अनुसार गर्भ संस्कार माता पिता के लिए होता है जो एक स्वस्थ बच्चे के लिए पूजा और प्रार्थना करते हैं। जबकि पुणसवन्ना संस्कार शुरू होता है गर्भ के तीसरे और चौथे महीने में। जब एक पुजारी बच्चे में दिव्य गुणों के आह्वान के लिए पूजन और वैदिक भजनों का पाठ करता है।
विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य पढ़ाने वाली और इस केन्द्र की समन्वयक डा. रेखा राय बताती हैं कि बीते अक्टूबर से यह केन्द्र संचालित किया जा रहा है। जिसमें गर्भवती महिलाएं गर्भ में पलने वाले बच्चों को हिंदू धर्म के सभी 16 संस्कारों से परिचित कराना चाहती हैं।
मुस्लिम महिलाएं भी करती रही हैं शिरकत
रोजाना तीन घंटे के लिए हम गर्भ संस्कार केन्द्र में गर्भवती महिलाओं को योग, संगीत, पेंटिंग और गर्भसंवाद के जरिए उनके गर्भ में पलने वाले बच्चों को सिखाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने बताया कि हमने आज 20 रजिस्ट्रेशन किए। कल होने वाले पुणसवन्न संस्कार में वैदिक हवन पूजन के अलावा पुजारी गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेदिक औषधि भी देंगे।
यह पूछने पर की अगर दूसरे धर्मों की महिलाएं इसमें प्रतिभाग करना चाहें, इसके जवाब में रेखा राय कहती हैं कि यह सबके लिए खुला है। कुछ मुस्लिम महिलाएं भी हमारे पूर्व के कार्यक्रमों में शिरकत करती रही हैं।
रोजाना तीन घंटे के लिए हम गर्भ संस्कार केन्द्र में गर्भवती महिलाओं को योग, संगीत, पेंटिंग और गर्भसंवाद के जरिए उनके गर्भ में पलने वाले बच्चों को सिखाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने बताया कि हमने आज 20 रजिस्ट्रेशन किए। कल होने वाले पुणसवन्न संस्कार में वैदिक हवन पूजन के अलावा पुजारी गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेदिक औषधि भी देंगे।
यह पूछने पर की अगर दूसरे धर्मों की महिलाएं इसमें प्रतिभाग करना चाहें, इसके जवाब में रेखा राय कहती हैं कि यह सबके लिए खुला है। कुछ मुस्लिम महिलाएं भी हमारे पूर्व के कार्यक्रमों में शिरकत करती रही हैं।