भोपाल में एम्स संस्थान में मनोचिकित्सा विभाग का बुरा हाल है। एम्स में मनोचिकित्सा विभाग का कोई डॉक्टर नहीं है। ओपीडी भी बंद रहती है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब इंडियन एक्सप्रेस की एक टीम ने भोपाल में एम्स की सुविधाओ का दौरा किया।
आपको बता दें कि भोपाल में एम्स की इमारत में 15 अगस्त, 2012 को ओपीडी सेवाएं शुरू की फिर 26 जनवरी 2013 को ओपीडी सेवाएं शुरू की गई। पांच साल बीत जाने के बाद आज तक पूर्णकालिक निदेशक नहीं मिला है। इसके पास 80 प्रतिशत फैकल्टी पद खाली पड़े हैं। ऐसे में एम्स ने अपनी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बंद कर दिया। मार्च 2015 में संस्थान ने 1099 रोगियों ने हिस्सा लिया। लेकिन अगले दो महीनों के अंदर सेवाएं बंद थीं।
एम्स भोपाल के एक वरिष्ठ सलाहकार के मुताबिक दिसंबर 2016 में एक डॉक्टर को भर्ती किया गया था, लेकिन यह एक निवासी डॉक्टर था और एक पूर्ण संकाय नहीं था। प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य सुविधा 2016 में आयोजित एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक कम से कम 15 करोड़ लोग भारत में सामान्य मानसिक स्वास्थ्य विकार से पीड़ित हैं। लेकिन 19 महीनों में भोपाल में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने एक मानसिक स्वास्थ्य रोगी नहीं देखा।
मई 2015 में भोपाल में एम्स ने इस तरह के मरीजों के लिए अपने ओपीडी को बंद कर दिया। 2013 के बाद से 8,452 मरीज सामने आए। पिछले महीने में कम से कम 15 रोगी यहां मिले। लेकिन यहां दोनों प्रोफेसरों ने छोड़ दिया। तब से अब तक यहां प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं हुई है।