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न्याय: भिंड में पत्नी की हत्या के मामले में पति को उम्रकैद, अदालत ने लगाया पांच हजार का जुर्माना

Fri, 02 Oct 2026 10:06 PM IST
भिन्ड ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड

सार

भिंड के पुलेह का पुरा गांव में पत्नी डोली की हत्या के मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने पति जबर सिंह दोहरे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अभियोजन ने 15 गवाहों और अन्य साक्ष्यों को अदालत में पेश किया।
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पति-पत्नी
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विस्तार
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पत्नी की हत्या के मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी पति जबर सिंह पुत्र भारत सिंह दोहरे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कोर्ट ने आरोपी को BNS की धारा 103(1) के तहत दोषी माना।

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हत्या के बाद पिता को दी थी जानकारी
मामला 26 जून 2025 का है। अभियोजन के अनुसार, पत्नी डोली की हत्या के बाद जबर सिंह ने खुद अपने पिता भारत सिंह को घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद भारत सिंह ऊमरी थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की सूचना दी। उसने फोन से डोली के मायके वालों को भी जानकारी दी। डोली के पिता की शिकायत पर पुलिस ने जबर सिंह और भारत सिंह के खिलाफ अपराध क्रमांक 135/2025 दर्ज किया। मामले में BNS की धारा 103(1) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।

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शादी के कुछ महीने बाद हुई हत्या
पुलिस जांच में सामने आया कि डोली की शादी जबर सिंह से 10 फरवरी 2025 को हुई थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने शादी का कार्ड और आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया। अभियोजन के मुताबिक, मोबाइल फोन में 25 जून की रात का एक वीडियो मिला था। अभियोजन ने अदालत में दावा किया कि वीडियो में आरोपी अपनी पत्नी का आपत्तिजनक वीडियो बनाने का प्रयास कर रहा था, जिसका डोली विरोध कर रही थी। इसी घटनाक्रम को हत्या की वजह के तौर पर पेश किया गया।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बनी अहम साक्ष्य
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डोली के चार माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने उसकी मौत की प्रकृति को हत्यात्मक बताया। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 15 गवाहों के बयान कराए और विभिन्न दस्तावेज व अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद जबर सिंह को दोषी माना। तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक उत्तम सिंह राजपूत ने पैरवी की।

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