लंपी वायरस से ग्रसित मृत मवेशियों के शव
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इन दिनों जानवरों से जानवरों में फैलने वाला लंपी वायरस कहर बना हुआ है। ऐसे में नदी में डाले गए मवेशियों के शव लंपी वायरस से ग्रसित होने की संभावना जताई जा रही थी। यदि ऐसा होता है तो नदी के पानी के संपर्क से वायरस आगे जाकर नदी का पानी पीने वाले जानवरों और इंसानों पर भी कितना असर कर सकता है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के मुख्य जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर यूपीएस कुशवाह ने बताया, लंपी वायरस जानवरों में फैलता है। इंसानों के संपर्क में आने की परिस्थिति के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए डेढ़ महीने की छुट्टी पर होने की बात कही। वहीं, जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर अनिल गोयल से लंपी से दूषित पेयजल जनसेवा करने पर इंसानों में दुष्प्रभाव को लेकर सवाल किया तो उन्होंने भी इस बात का ज्ञान न होने की बात कह कुछ भी कहने से मना कर दिया।
वहीं, गोहद में लापरवाही का वीडियो सामने आने के बाद नगर पालिका सीएमओ सतीश कुमार दुबे ने बताया, यह घोर लापरवाही है। नगर पालिका के दोनों कर्मचारी दैनिक वेतनभोगी हैं। इसलिए उन्हें नगर पालिका की सेवाओं से तुरंत हटाया जाता है। साथ ही अन्य सभी ड्राइवर और कर्मचारियों को भी हिदायत दे दी है कि इस तरह की लापरवाही आगे से नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, मृत गोवंश लंपी वायरस से ग्रसित नहीं थे। वह सड़क हादसों का शिकार हुए मवेशी थे। इस तरह के मवेशियों को नगर के केशव पार्क की जमीन पर इकट्ठा कर गड्ढा बनाकर दफनाने की व्यवस्था की गई है। लंपी वायरस से मवेशियों की मौत का अब तक कोई मामला गोहद क्षेत्र में नहीं आया है।