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Bhind: शिक्षा अधिकारी ने अपने भृत्य को बनाया एक दिन के लिए BEO, सब बराबरी महसूस करें, इसलिए की पहल

Wed, 30 Nov 2022 05:40 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड

सार

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में शिक्षा विभाग के एक विकासखंड अधिकारी बीईओ ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने अपने मातहत एक भृत्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एक दिन के लिए अपना कार्यभार सौंपकर चेंबर और कुर्सी पर बैठा दिया।
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भृत्य, रमेश श्रीवास - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भिंड जिले में शिक्षा विभाग के एक खंड विकास अधिकारी ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने अपने मातहत एक भृत्य (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) को एक दिन के लिए अपना कार्यभार सौंपकर अपने चेंबर और कुर्सी पर बैठा दिया। खास बात ये कि उन्होंने यह सब केवल जुबानी जमा खर्च पर नहीं, बल्कि बाकायदा शासकीय आदेश निकालकर किया।

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बता दें कि यह अनूठी पहल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुदामा सिंह भदौरिया ने की, जो पूरे अंचल में चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने अपने दफ्तर में ही कार्यरत भृत्य रमेश श्रीवास को एक दिन यानी 30 नवंबर 2022 को बीईओ के रूप में पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया, जिसमें भृत्य श्रीवास को 30 नवंबर को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भिंड का चार्ज सौंपने की बात लिखी है। हालांकि, उसमें स्पष्ट लिखा है कि इसमें उनके पास प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार नही रहेंगे, क्योंकि इसकी लंबी प्रक्रिया होती है।

कलेक्टर से करवाया अनुमोदन...
बीईओ भदौरिया ने इस ऑर्डर को कलेक्टर के पास अनुमोदन के लिए भेजा तो वहां सभी अधिकारी और कर्मचारी इसे देखकर चौंक गए। इसके बाद भदौरिया ने वहां जाकर सबको इसके पीछे का अपना मंतव्य बताया तो कलेक्टर ने भी तत्काल इसे अनुमोदित कर दिया। भदौरिया कहते हैं कि मैंने एक प्रयोग किया है, जिसका उद्देश्य किसी भी कर्मचारी के मन में यह भाव न रहे कि हम छोटे कर्मचारी हैं। मेरा मानना है कि शासन-प्रशासन के द्वारा हम सभी पदस्थ कर्मचारियों को जो शक्तियां प्रदत की गई हैं, वह सभी के लिए अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण होती हैं। सभी को अपने पद एवं कर्तव्य का बोध कराती हैं, जिससे हम सभी शासन और प्रशासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमानुसार कार्य करते हैं।
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'ये न समझें कि हम बड़े ओहदे पर हैं'
भदौरिया ने कहा कि हम मानते हैं दफ्तर में कार्यरत हर कर्मचारी का अपना एक ओहदा होता है और उसका अपना सम्मान होता है। इसलिए किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि हम बड़े ओहदे पर बैठे हैं तो हमारा अलग से सम्मान होगा। इस पहल से जो अधीनस्थ कर्मचारी हैं, उन्हें भी लगेगा कि उसका भी उतना ही सम्मान है, जितना बड़े ओहदे के कर्मचारी का है। सभी को बराबर सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भविष्य में इस प्रकार के प्रयोग और भी करेंगे। इससे कार्यालय का वातावरण सौहार्द पूर्ण रहेगा और सभी को एक दूसरे के कार्यों की महत्वता की समझ आएगी और परस्पर सम्मान बढ़ेगा।

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