8 अक्टूबर के बाद क्यों नहीं लौटी स्नेहलता
मामले में 8 अक्टूबर की तारीख अहम बताई जा रही है। इसी दिन सत्यप्रकाश स्नेहलता को कानपुर घुमाने के बहाने ले गया था। स्नेहलता ने अपनी एक दोस्त को फोन पर कानपुर जाने की जानकारी भी दी थी। इसके बाद घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि स्नेहलता का कोई पता नहीं चला। वह कहां गई? उसके साथ क्या हुआ? क्या वह वापस लौटने वाली थी? इन सवालों के जवाब तलाशने के बजाय शुरुआती तौर पर मामला गुमशुदगी के रूप में सामने आया।
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थाने पहुंचा शिकायतकर्ता
इस कहानी का सबसे अहम मोड़ तब सामने आया, जब सत्यप्रकाश खुद स्नेहलता की गुमशुदगी दर्ज कराने थाने पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक उसने पुलिस को आवेदन दिया और गुमशुदगी का पर्चा भी छपवाया लेकिन पुलिस ने जब मामले की पड़ताल शुरू की और सत्यप्रकाश से पूछताछ की तो जांच का रुख बदल गया। उस पर ही स्नेहलता की हत्या करने का आरोप सामने आया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान जानकारी मिली कि स्नेहलता की हत्या के बाद उसके शव को उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया गया है।
पचनदा में चल रही है तलाश
- फोटो : अमर उजाला