12 जून को संत भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि उनपर कर्ज है जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है। मगर उनके करीबियों का कहना है कि महाराज पर कोई कर्ज नहीं था। यदि ऐसा होता तो वह एक महीने पहले बीएमडब्ल्यू बुक नहीं कराते। गाड़ी के लिए वह 23 लाख रुपए का भुगतान कर चुके थे। वहीं उन्होंने अपनी लग्जरी कारों का भी सौदा कर लिया था। इसके अलावा शिवनेरी के नवीनीकरण के लिए भी एक करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च कर चुके थे।
नजदीकियों का यह भी कहना है कि भय्यूजी द्वारा बेटी
कुहू को विदेश में सैटल करने के लिए 10 लाख रुपए जैसी छोटी रकम के लिए कर्ज का दबाव की वजह से आत्महत्या करने की बात कुछ जंच नहीं रही है। कुहू के विदेश चले जाने के बाद पत्नी और बेटी के बीच होने वाली कलह खत्म होने वाली थी। अभी कई ऐसे लोग हैं जो इस रहस्य से पर्दा उठा सकते हैं मगर उनके बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। सद्गुरु दत्त पारमार्थिक ट्रस्ट पर भी कर्ज होने की बात गलत है। ट्रस्ट पर कोई कर्ज नहीं है। हर साल ट्रस्ट द्वारा नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाते हैं। इस साल ट्रस्ट ने 28 लाख रुपए का जल संरक्षण का काम मराठवाड़ा में किया है।
करीबियों के मुताबिक
भय्यूजी महाराज के तीन ऐसे नजदीकी सेवादार हैं जो घटना के समय शहर में मौजूद नहीं थे। जिनके नाम शरद देशमुख, शशि देशमुख और एक तीसरा है। इन तीनों से ही अभी तक पूछताछ नहीं की गई है। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि महाराज हर काम योजनानुसार करते थे। किसी भी काम को शुरू करने से पहले उसका खाका कागज पर तैयार करते थे। सभी को कागज पर लिखने की हिदायत दिया करते थे। ऐसे में उनका वसीयत ना बनाना और सुसाइड नोट में पत्नी या बेटी के लिए एक भी शब्द ना लिखना समझ से परे है।
इस आत्महत्या मामले में रविवार को पुलिस ने मुख्य संदेही सेवादार अमोल चव्हाण से पूछाताछ की। जिसने बताया कि महाराज चाहते थे कि बेटी कुहू 12 जून को इंदौर ना आए। उसने बताया कि महाराज ने फोन पर उससे बेटी को विदेश भेजने और कोचिंग के सिलसिले में बात की थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि कुहू को समझाओ की वो इंदौर ना आए। महाराज खुद पुणे जाने वाले थे लेकिन बेटी ने जब इंदौर आने की जिद पकड़ ली तो वह वापस लौट आए।