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Betul News: कर्ज नहीं चुकाया तो बेटे को ठेकेदार ने बनाया बंधक, छह साल कराई मजदूरी, प्रशासन ने कराया मुक्त

Fri, 19 Sep 2025 11:37 AM IST
बैतूल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल

सार

फिलहाल दस्तावेज़ न होने के कारण गोविंद को छिंदवाड़ा के बालगृह भेजा गया है। आरोपी पर बाल श्रम और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 3 महीने से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है।
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कार्रवाई करने पहुंची प्रशासन की टीम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मासूम बच्चे को कर्ज़ की अदायगी न कर पाने के कारण छह साल तक बंधक बनाकर रखा गया। जानकारी मिलने पर प्रशासन की टीम ने उसे मुक्त कराया।
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शाहपुर क्षेत्र के गंजू उईके और सरिता उईके ने वर्ष 2019 में हरदा ज़िले के झिरीखेड़ा गांव में मजदूरी करते समय एक ठेकेदार से 50 हज़ार रुपये उधार लिए थे। कर्ज़ चुकता न कर पाने पर ठेकेदार रूपेश शर्मा ने उनके सात वर्षीय बेटे गोविंद को अपने पास रोक लिया और उससे पशु चराने सहित घरेलू काम करवाने लगा।

परिजन कई बार बेटे को वापस लाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस दौरान बच्चा लगातार बंधुआ मजदूरी करता रहा। हाल ही में सामाजिक संस्था जन साहस की कार्यकर्ता पल्लवी ठकराकर को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत कलेक्टर और श्रम विभाग को सूचित किया। इसके बाद बैतूल प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने हरदा पहुंचकर गोविंद को छुड़ाया।
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रेस्क्यू के दौरान ठेकेदार का भाई बच्चे को खेत में छिपाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन टीम ने उसे सुरक्षित निकाल लिया। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी रूपेश शर्मा पर बाल श्रम अधिनियम और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इन धाराओं के तहत तीन महीने से लेकर दस साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

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फिलहाल पहचान दस्तावेज़ न होने की वजह से गोविंद को छिंदवाड़ा के बालगृह भेजा गया है। प्रशासन ने जन्म प्रमाण-पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आगे बच्चे को सुरक्षित रूप से परिजनों को सौंपा जा सके।

मां सरिता उईके का कहना है की बेटे को छोड़कर आना मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द है। उम्मीद थी कि रेस्क्यू के बाद वह मेरे पास लौट आएगा, लेकिन कागज़ों की कमी से उसे बालगृह भेज दिया गया। पिता गंजू उईके का कहना है कि हम मजदूरी करने गए थे और शादी के लिए 50 हज़ार उधार लिया। दो साल काम किया फिर भी रकम 60 हज़ार बताई गई और न चुका पाने पर बेटे को बंधक बना लिया गया।
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पल्लवी ठकराकर (एनजीओ प्रतिनिधि) ने कहा मामले की जानकारी मिलने पर तुरंत प्रशासन को सूचित किया गया और टीम भेजकर बच्चे को छुड़वाया गया। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अभिषेक जैन ने बताया कि बच्चे का जन्म प्रमाण-पत्र न होने के कारण उसे फिलहाल बालगृह भेजा गया है। आवश्यक दस्तावेज़ बनने के बाद उसे माता-पिता को सौंपा जाएगा।

 

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