बैंक लोन फ्रॉड मामले में ईडी का एक्शन
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जिले में 13.99 करोड़ रुपये के नाबार्ड टर्म लोन के दुरुपयोग और धनराशि को दूसरी जगह डायवर्ट किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की है। ईडी के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय की टीमों ने सेंधवा क्षेत्र में मेसर्स निमाड़ एग्रो पार्क, उसके साझेदारों और उससे जुड़ी संस्थाओं के चार परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत की गई। कार्रवाई के दायरे में निमाड़ एग्रो पार्क के अलावा बी.एस. कॉटन प्राइवेट लिमिटेड, श्री राजराजेश्वर डेवलपर्स और श्री राजराजेश्वर वेंचर्स भी शामिल हैं।
31 करोड़ की परियोजना के लिए 13.99 करोड़ का लोन
ईडी के अनुसार मामला बड़वानी की सेंधवा तहसील के जामली गांव में प्रस्तावित एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर परियोजना से जुड़ा है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 31.04 करोड़ रुपये थी। इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय से 10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और नाबार्ड से 13.99 करोड़ रुपये का टर्म लोन शामिल था।
जांच एजेंसी को कथित तौर पर संदेह है कि स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए लोन लिया गया था। ईडी ने रकम का एक हिस्सा अन्य गतिविधियों में डायवर्ट किए जाने के संकेत मिलने की बात कही है। जांच के मुताबिक निर्धारित उद्देश्य से धनराशि का कथित तौर पर इस्तेमाल नहीं होने के कारण प्रस्तावित परियोजना पूरी नहीं हो सकी और बाद में संबंधित लोन खाते को 29 सितंबर 2024 को NPA घोषित कर दिया गया। अब ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि लोन की रकम किन खातों में गई, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और इस कथित मनी ट्रेल में किन लोगों और संस्थाओं की भूमिका रही।
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सीबीआई की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
मामले की जांच की शुरुआत सीबीआई की कोलकाता स्थित इकोनॉमिक ऑफेंसेस ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ी है। FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार समेत विभिन्न आरोपों की जांच की जा रही है। इसी FIR के आधार पर ED ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की।
दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त, चार लॉकर फ्रीज
तलाशी के दौरान ईडी की टीमों ने वित्तीय लेनदेन और परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। इसके अलावा संबंधित व्यक्तियों के चार बैंक लॉकर फ्रीज किए गए हैं। इन लॉकरों में मौजूद संपत्ति और दस्तावेजों की भी आगे जांच की जाएगी।
ईडी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि नाबार्ड से मिली 13.99 करोड़ रुपये की राशि किस-किस खाते में पहुंची और उसका वास्तविक इस्तेमाल किस तरह हुआ। एजेंसी परियोजना से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। तलाशी से मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है और कथित धन के प्रवाह के साथ संबंधित पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।