कावड़ यात्रा से पहले नर्मदा का दूग्धाभिषेक किया गया।
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श्रावण मास के प्रथम सोमवार को खरगोन जिले के महेश्वर से उज्जैन तक निकलने वाली बाणेश्वरी कावड़ यात्रा शुरू हो गई। यात्रा का यह 21वां वर्ष है।
सुबह 9.30 बजे नर्मदा मंदिर परिसर नर्मदा घाट पर संत मोनी बाबा आश्रम से बालक दासजी महाराज, बडगोंदा आश्रम और दयालु गुरु दयालु मित्र मंडल प्रमुख के सानिध्य में संस्कृत विद्यापीठ नरसिंह टेकड़ी के आचार्य और पंडित नरेंद्र रावल ने नर्मदा पूजन कराया। इसके बाद 501 लीटर दूध से नर्मदा का अभिषेक कर सहायता के रामघाट से महेश्वर के नर्मदा मंदिर घाट तक 1100 मीटर लंबी चुनरी ओढ़ाई गई।
किनारे पर 50 फीट के दायरे में जल दूधिया हो गया। यात्रा संयोजक गोलू शुक्ला ने नर्मदा का निर्मल जल कावड़ में में भरकर यात्रा की शुभारंभ किया। सम्मानित संतों के साथ पैदल नग्न पैर गांव के मुख्य मार्ग से यात्रा निकाली गई। मातृशक्ति को प्राथमिकता के उद्देश्य से लाडली लक्ष्मी बहना की झांकी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा महाकाली की प्रतिमा व भगवान शिव के साथ मूषक पर सवार गणेश जी को दिखाया गया। 6 से ज्यादा जगह समाजजन, जनप्रतिनिधियों व संस्था प्रतिनिधियों ने संतों की अगवानी की। बाजार चौक पे गुलाब के फूलों से महेश बाबा व साथियों ने कावड़ियों का स्वागत किया। यात्रा में लगभग 1100 कावड़िए शामिल हैं। यात्रा 16 जुलाई रात्रि को महाकाल नगरी पहुंचेगी। 17 जुलाई सोमवार को यहां नर्मदा नीर से महाकालेश्वर भगवान का अभिषेक किया जाएगा।