मां से दुष्कर्म करने पर बेटे को मिली फांसी की सजा
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रिश्तों को तार-तार कर देने वाले एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाले मामले में बंडा सिविल न्यायालय के अपर सत्र जिला न्यायाधीश रामलाल शाक्य ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मां के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी निर्मम हत्या करने के दोषी बेटे को न्यायालय ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसके साथ ही संबंधित धाराओं के तहत 1-1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घिनौनी घटना 19-20 जुलाई 2025 की रात बंडा के बिनैका थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की है। आरोपी पर आरोप था कि अपनी ही मां को हवस का शिकार बनाया और दुष्कर्म जैसे घृणित कृत्य के बाद सबूत मिटाने व अन्य कारणों से उसकी हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध को लेकर क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त था। घटना के संबंध में बिनैका थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 64(2)(एफ) एवं 103 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया था। अपराध की गंभीरता को देखते हुए बिनैका थाना प्रभारी भूपेन्द्र विश्वकर्मा ने मामले की बारीकी से विवेचना की। पुलिस टीम ने घटनास्थल से तमाम वैज्ञानिक साक्ष्य, दस्तावेजी सबूत और अहम तथ्य जुटाकर समयबद्ध तरीके से न्यायालय के समक्ष पेश किए।
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न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक बंडा, संजय कुमार पटेल ने मजबूत पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपर सत्र जिला न्यायाधीश रामलाल शाक्य ने आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई।
जघन्य श्रेणी का अपराध
इस फैसले पर विशेष लोक अभियोजक, बंडा संजय पटेल ने कहा कि यह एक अत्यंत दुर्लभ और जघन्य श्रेणी का अपराध था, जिसमें एक बेटे ने मानवता और रिश्तों की सभी मर्यादाओं को तार-तार किया था। पुलिस की सघन विवेचना और अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में रखे गए पुख्ता सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना और मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला समाज में न्याय और कानून के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है।