आदिवासी अंचल में बीमारी से बच्चों की मौत का मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सरकार और सिस्टम के सामने बड़ा सवाल बन गया है। 25 बच्चों की मौत के बाद आदिवासी समाज में पसरे मातम का असर रक्षाबंधन के त्योहार पर भी दिखाई दिया। 21 अगस्त से जयस्तंभ चौक के पास आंदोलन कर रहे आदिवासी युवाओं ने इस बार राखी का पर्व नहीं मनाया। उनका कहना है कि जब कई परिवार अपने बच्चों को खो चुके हैं तो ऐसे माहौल में त्योहार की खुशियां मनाना संभव नहीं है।
अब इस पूरे मामले के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 अगस्त को प्रभावित ग्राम कोरका पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री गोंदिया के बिरसी हवाई अड्डे से हेलीकॉप्टर से लांजी पहुंचेंगे और वहां से कोरका जाएंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए बालाघाट में उनके पूर्व निर्धारित सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
जिस घर में राखी की जगह मातम था
आंदोलनकारी ललित उईके ने कहा कि उनके समाज के लिए 25 बच्चों की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है। कई घरों में त्योहार की तैयारियों के बजाय मातम पसरा हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों में दो परिवार ऐसे हैं, जहां भाई-बहनों की एक के बाद एक मौत हुई। ऐसे परिवारों का दर्द देखकर आंदोलनकारियों ने भी रक्षाबंधन नहीं मनाने का फैसला किया। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार का ध्यान प्रभावित परिवारों की ओर दिलाना है। उनकी प्रमुख मांगों में मृतक बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता, मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य व पेयजल की बेहतर व्यवस्था शामिल है।
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अब कोरका में CM से आमना-सामना
21 अगस्त से जारी आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री का कोरका दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री के सामने सीधे अपनी मांगें रखेंगे और जानना चाहेंगे कि बच्चों की मौत के बाद सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। वहीं पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में सिस्टम की लापरवाही के कारण यदि 25 बच्चों की मौत होती है तो सरकार के विकास और जनविश्वास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मुंजारे ने मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ घेराव करने की घोषणा की है।
बीमारी के बीच व्यवस्था पर उठे सवाल
बिरसा क्षेत्र के आदिवासी पंचायतों के गांवों और मंझरेटोलों में खसरा, मलेरिया, त्वचा रोग सहित अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए दो मंत्रियों ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि इसके बावजूद मृतक परिवारों के लिए अब तक सहायता राशि की घोषणा नहीं की गई और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।
राखी की कलाई से अब सरकार से जवाब तक
इस बार कई आदिवासी परिवारों की कलाइयां राखी के धागे से सूनी रहीं। त्योहार नहीं मनाने का फैसला अब आंदोलन का प्रतीक बन गया है। 29 अगस्त को मुख्यमंत्री जब कोरका पहुंचेंगे, तब सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि 25 बच्चों की मौत के बाद सरकार प्रभावित परिवारों को क्या राहत देती है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई करती है।