मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से वन्यजीव अपराध की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहाँ खैरलांजी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरटोला में शिकारियों ने एक वयस्क नर भालू की बेरहमी से हत्या कर दी। क्रूरता की हदें पार करते हुए शिकारियों ने साक्ष्य मिटाने और पहचान छिपाने के उद्देश्य से भालू के शव को छह से सात टुकड़ों में काट दिया और उसे एक खेत में बने कुएं में फेंक दिया। वन विभाग ने क्षत-विक्षत शव को बरामद कर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
खेत के कुएं में तैरते मिले भालू के टुकड़े
यह दर्दनाक वाकया शनिवार सुबह तब उजागर हुआ, जब पिपरटोला निवासी किसान जियालाल धुर्वे हमेशा की तरह अपने खेत पर काम करने पहुंचे थे। जब उन्होंने खेत में बने कुएं के भीतर झांका, तो उन्हें पानी में किसी बड़े जानवर का शव तैरता हुआ दिखाई दिया। कुएं से आ रही तेज दुर्गंध और संदिग्ध स्थिति को देखते हुए किसान ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन्यजीव की मौत की खबर मिलते ही वन अमले में हड़कंप मच गया।
शव की हालत देख हैरान रह गए अधिकारी
सूचना मिलते ही खैरलांजी के वन परिक्षेत्र अधिकारी डी.सी. वासनिक अपनी रेस्क्यू टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। जब स्थानीय ग्रामीणों की मदद से कुएं के गहरे पानी से शव को बाहर निकाला गया, तो उसकी भयावह स्थिति देखकर वन अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कुएं से निकला शव एक वयस्क नर भालू का था, जिसे धारदार हथियार से बुरी तरह काटा गया था। शिकारियों ने भालू का सिर धड़ से पूरी तरह अलग कर दिया था।
उसके चारों पैर बेरहमी से काट दिए गए थे। इतना ही नहीं, वन्यजीवों के अंगों की तस्करी की ओर इशारा करते हुए भालू के आगे के दोनों पैरों के नाखून भी गायब पाए गए। पूरा शव लगभग छह से सात अलग-अलग टुकड़ों में बिखरा हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, शव करीब दो से तीन दिन पुराना लग रहा था, जिससे पानी में रहने के कारण वह काफी सड़ चुका था।
पढ़ें: : मालवा पर मेहरबान मानसून, इंदौर संभाग में तीन दिन झमाझम बारिश के आसार; मौसम विभाग ने चेताया
डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक जांच शुरू
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ, डीएफओ और सीसीएफ सहित वन विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मामले की जानकारी दी गई। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम भी घटना स्थल पर बुलाई गई। खोजी कुत्तों की मदद से खेत और आसपास के जंगलों में शिकारियों के सुराग ढूंढने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम से भालू के अंगों का पोस्टमार्टम करवाया। इसके बाद कानूनी नियमों के तहत वन विभाग की मौजूदगी में भालू के अवशेषों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
तस्करी की आशंका, जांच में जुटा प्रशासन
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला सीधे तौर पर वन्यजीव के अवैध शिकार और अंगों की तस्करी से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। भालू के नाखूनों का गायब होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि अंधविश्वास या अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने के लिए इस क्रूर वारदात को अंजाम दिया गया है। विभाग ने अज्ञात शिकारियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।