बालाघाट जिले में बाघ नाखून तस्करी प्रकरण ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। फरार चल रहे आरोपी सतीश भलावी को वन विभाग की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अहम खुलासा किया, जिसके आधार पर लामता के मैरा जंगल के नाले में खुदाई की गई। वहां से हड्डियों के टुकड़े बरामद हुए, जिसने एक और बाघ की मौत की आशंका को गहरा दिया है। वन विभाग ने बरामद हड्डियों को फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेज दिया है, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि ये हड्डियां बाघ की हैं या किसी अन्य जानवर की।
14 अक्तूबर की कार्रवाई से शुरू हुआ था मामला
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला 14 अक्तूबर को तब सामने आया था जब उत्तर वनमंडल सामान्य परिक्षेत्र उत्तर उकवा में वन विभाग की टीम ने बाघ के 13 नाखूनों के साथ दो आरोपियों महेंद्र मड़ावी और महेंद्र राऊत को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के दौरान सतीश भलावी और नंदकिशोर पटले फरार हो गए थे। वन विभाग तब से दोनों की तलाश कर रहा था।
नाले में छिपे थे नाखून और हड्डियां
गिरफ्तारी के बाद सतीश भलावी ने बताया कि उसे बाघ के नाखून जंगल के एक नाले में मिले थे। इन्हीं नाखूनों को उसने बेचने के लिए महेंद्र मड़ावी को दिया था। सतीश की निशानदेही पर वन विभाग की टीम मैरा जंगल के कक्ष क्रमांक 1189 में पहुंची और नाले में खुदाई की। वहां से कुछ हड्डियों के टुकड़े मिले, जिन्हें टीम ने कब्जे में लेकर जांच के लिए भेज दिया।
एक और बाघ की मौत का शक
सतीश ने जांच में बताया कि बरामद हड्डियां बाघ की हैं। इससे यह संभावना और मजबूत हो गई है कि क्षेत्र में एक और बाघ की मौत हुई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या शिकार के कारण। इन सवालों के जवाब फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही मिल पाएंगे।
वन विभाग की निगरानी बढ़ी, एक आरोपी अब भी फरार
इस मामले में चौथा आरोपी नंदकिशोर पटले, निवासी ग्राम फंडकी (मोहगांव), अभी तक फरार है। उसकी तलाश में वन विभाग की एसओएस और फील्ड टीमें बालाघाट, मंडला और जबलपुर के जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी साक्ष्य को छिपाने या मिटाने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों में दहशत, जंगल में सर्चिंग तेज
लामता क्षेत्र में हड्डियां मिलने के बाद वन अमला ने जंगल में गश्त और सर्चिंग तेज कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ समय से जंगल में बाघ की दहाड़ें सुनाई नहीं दे रही थीं, जिससे शक और गहराया है कि किसी बाघ का शिकार हुआ हो सकता है।
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वन विभाग को शक: नाखून और हड्डियां उसी बाघ की हो सकती हैं
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग को संदेह है कि बरामद नाखून और हड्डियां एक ही बाघ की हो सकती हैं। यदि फॉरेंसिक जांच में यह साबित होता है, तो मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 और 51 के तहत दर्ज किया जाएगा, जिसमें 7 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
डीएफओ बालाघाट के निर्देशन में एसडीओ (वन) और आरओ लामता के नेतृत्व में टीमें लगातार जांच कर रही हैं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमने हड्डियों को जांच के लिए भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ये बाघ की हैं या नहीं। आगे की कार्रवाई फॉरेंसिक परिणामों के आधार पर की जाएगी।
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