फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

विधानसभा चुनाव परिणाम: इन दो वजहों ने मध्यप्रदेश में भाजपा से छीनी सत्ता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Wed, 12 Dec 2018 10:55 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। 230 सीटों पर हुए इन चुनावों में बहुमत के लिए 116 सीटें जीतना जरूरी था।  कांग्रेस ने यहां 114 सीटें हासिल कर ली हैं। वहीं भाजपा 109 सीटों पर सिमट गई है। 2 सीटों पर बसपा के समर्थन के बाद अब यहां कांग्रेस की सरकार बनेगी। 15 सालों के बाद भाजपा से सत्ता यूं ही नहीं छिनी। इसके पीछे के कारण कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के रोड शो और रैलियों के अलावा कुछ और भी हैं। 



इनमें से सबसे बड़ा कारण है एससी एसटी एक्ट। जिसका विरोध राज्य में उच्च जाति के लोग करते आ रहे हैं। कई लोगों ने तो अपने घरों के बाहर बकायदा पोस्टर लगाकर कहा था कि वह नोटा का बटन ही दबाएंंगे। सरकार के इस फैसले की सोशल मीडिया पर भी स्वर्ण वर्ग ने काफी आलोचना की। 


भाजपा की राज्य में हार की दूसरी वजह है किसानों की नाराजगी। देशभर के किसानों द्वारा अभी तक सरकार के खिलाफ कई प्रदर्शन हो चुके हैं। वहीं किसानों की दयनीय स्थिति से देश की जनता भी वाकिफ है। जनता में भी किसानों की दशा पर निराशा है। ये भी मध्य प्रदेश में भाजपा के वोट घटाने का एक कारण है। 

एससी-एससटी सीटें पर कांग्रेस आगे

एससी-एसटी एक्ट को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य एससी-एसटी वर्ग का वोट प्राप्त करना हो सकता है। लेकिन जो नतीजे सामने आए, उनसे लगता है कि सरकार इन वोटरों को साधने में भी नाकाम साबित हुई है। नतीजों से पता चलता है कि एससी और आदिवासी सीटों पर कांग्रेस की कुल 27 सीटें बढ़ गई हैं। इससे पहले साल 2013 में एससी के लिए रिजर्व 35 सीटों में से कांग्रेस ने केवल 4 ही हासिल की थीं। इस बार उसने यहां 17 सीटें जीती हैं।



बता दें सरकार के विरोध स्वर्ण आंदोलन एससी एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन और फिर पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर ही खड़ा हुआ था। एससी सीटों पर भाजपा की यह बीते 5 चुनावों में सबसे बड़ी हार है।

 

इन कांग्रेस नेताओं ने नहीं छोड़ी कोई कसर

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और अन्य नेताओं ने पार्टी को जिताने के लिए इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने 58 सभाएं की और 45 फीसदी वोट तय किए। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी प्रदेश में 90 सभाएं की और 40 फीसदी वोट तय किए। कमलनाथ के क्षेत्र महाकौशल और ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस ने पिछली बार से 23 सीटें अधिक जीती हैं। इसका एक कारण ग्वालियर-चंबल में हुई हिंसा भी है, जो भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हुई है। 

मालवा-निमाड़ में गंवाई 27 सीटें

स्वर्ण आंदोलन और किसान आंदोलन का फायदा कांग्रेस को हुआ है। किसान आंदोलन की शुरुआत इंदौर-उज्जैन संभाग की 66 सीटों पर हुई। वहीं स्वर्ण आंदोलन का असर भी उज्जैन और शाजापुर जिलों में देखने को मिला था। यहां कांग्रेस पार्टी को 25 सीटों का फायदा हुआ है। वहीं मालवा-निमाड़ में भाजपा को 27 सीटों का घाटा हुआ है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next