मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यापम घोटाले के बाद वहां एक और बड़े घोटाले की परतें उधड़नी शुरू हो गई हैं। मामले का खुलासा करने वाले एक व्हिसलब्लोअर ने दावा किया कि इस नए घोटाले में आईएएस आईपीएस और विभिन्न अदालतों के जज ने अपने बेटे बेटियों के लिए व्यापम के तहत प्राइवेट मेडिकल कालेजों में सीट पक्की की।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार व्यापम के बाद यह घोटाला भी प्रदेश में बड़ा स्तर पर चल रहा था, बताया जा रहा है इसके भी तार व्यापम घोटाले से जुड़े हुए थे।
व्यापम मामले में सीबीआई जांच की मांग करने वाले व्हिसलब्लोअर इन जजों और नौकरशाहों के नाम सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश कर प्रदेश के डेंटल एंड मेडिकल एडमिशन टेस्ट (DMAT) की भी व्यापक जांच की मांग कर सकते हैं।
मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका
बता दें कि अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डेंटल मेडिकल कालेज ऑफ मध्यप्रदेश ने बीते शुक्रवार को डीमैट 2015 की प्रवेश परीक्षा रद कर दी थी। जो 12 जुलाई को होनी थी, हालांकि अभी नई तिथियों की घोषणा नहीं हुई।
व्यापम की तर्ज पर ही डीमैट घोटाले को अंजाम देकर प्रदेश के मेडिकल कालेजों में फर्जी छात्र छात्राओं को प्रवेश दिया जा रहा था।
व्हिसलब्लोअर आनंद राय ने बताया कि उन्होंने डीमैट घोटाले में संलिप्त रहे पूर्व जजों, आईएएस और आईपीएस के नाम सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिए हैं।
उनके वकील ने बताया कि जल्द ही ये नाम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को सौंपे जाएंगे। उम्मीद है कि यह जानकारी जल्द ही अन्य तीन व्हिसलब्लोअर द्वारा दायर की गई याचिकाओं की सामूहिक सुनवाई के दौरान साझा की जा सकती हैं।
व्यापम की तरह दिए जाते थे फर्जी एडमिशन
मामले में आनंद राय के अलावा आशीष चतुर्वेदी और प्र्रशांत पांडे ने भी डीमैट घोटाले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।
मामले की ही अन्य याचिकाकर्ता आशीष चतुर्वेदी बताते हैं कि डीमैट स्कैम में यह खेल साल 2006 से चल रहा है, लेकिन सरकार ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए यह जरूरी है कि सीबीआई सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी जांच करे तो कुछ बड़े नामों का खुलासा भी हो सकता है।
आशीष कहते हैं कि आरोप इस बात से सही साबित हो जाते हैं कि प्रदेश की एडमिशन एंड फीस रेगुलेरिटी कमेटी ने छह प्राइवेट मेडिकल कालेजों पर साल 2010 से 2013 तक प्रदेश कोटे की 721 सीटों में अनियमितता करने के आरोप में 13.10 करोड़ का जुर्माना लगाया था।
कांग्रेस ने भी उठाया मुद्दा
उन्होंने बताया कि मेरे द्वारा दायर की गई याचिका में यह सभी जानकारी दी गई हैं। विभिन्न व्हिसलब्लोअर के अलावा विपक्षी कांग्रेस भी यह आरोप लगाती रही है।
बीते महीने मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने उन 14 लोगों के नाम लिए थे जिन्होंने डीमैट घोटाले के तहत अपने रिश्तेदारों के लिए सीटें पक्की कीं। उनमें जिनमें न्यायिक सेवाओं से जुड़े कई लोगों के नाम भी थे।
अपनी इन्हीं गतिविधियों के चलते डीमैट लंबे समय से संदिग्ध बना हुआ था। लेकिन पूर्व व्यापम निदेशक योगेश उप्रीत की 30 मई को गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी का निशाना डीमैट हो गया था।