मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ और लोकपाल की मांग के लिए ऐतिहासिक लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हजारे ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल अधिनियम को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
अन्ना हजारे ने रविवार की शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कम बोलते थे, लेकिन उन्होंने भी लोकपाल कानून को कमजोर किया था। उसके बाद मोदी सरकार ने इसे और कमजोर बना दिया।
यह भी पढ़ें: अन्ना हजारे ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- मन की बात करने के लिए मन साफ होना जरूरी
अन्ना ने कहा कि मोदी सरकार ने 27 जुलाई 2016 को संसद में एक संशोधन पेश किया, जिससे लोकपाल अधिनियम और कमजोर हो गया। इसके अनुसार सरकारी अधिकारियों के परिजनों (पत्नी, पुत्र, पुत्री व अन्य) को हर साल अपनी संपत्ति की जानकारी देने के जरूरत नहीं है। अन्ना जल संरक्षण के लिए आयोजित तीन दिवसीय ‘जल सम्मेलन’ में हिस्सा लेने के लिए खजुराहो पहुंचे थे।
हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल अधिनियम के मूल कानून के अनुसार सरकारी कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों के लिए हर साल अपनी संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य था। उन्होंने कहा कि संशोधन विधेयक को लोकसभा ने बगैर चर्चा के एक दिन में पारित कर दिया था।
इसके बाद इस संशोधन विधेयक को 28 जुलाई को राज्यसभा में पेश किया गया और 29 जुलाई को इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया। अन्ना ने कहा कि इस कानून को मात्र तीन दिन में कमजोर बना दिया गया।
23 मार्च को आंदोलन की घोषणा करेंगे अन्ना हजारे
अन्ना हजारे
यही नहीं अन्ना हजारे ने 23 मार्च को लोकपाल और किसानों की समस्या को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में 23 मार्च को आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह विभिन्न मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई पत्र लिख चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
अन्ना ने कहा कि 1950 के एक अधिनियम के मुताबिक किसानों के फसल ऋण पर चक्रवृद्धि ब्याज नहीं लगना चाहिए, लेकिन बैंक ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में कोई कदम नहीं उठा रही है। अन्ना ने 60 साल से अधिक उम्र के किसानों को 5000 रुपये मासिक पेंशन देने की मांग भी की।
यह भी पढ़ें: दिल्ली में बोले अन्ना, प्रधानमंत्री के पास पत्रों का जवाब देने का समय नहीं
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी अन्ना हजारे लोकपाल के मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अन्ना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखकर लोकपाल बिल पर एक बार फिर से बड़ा आंदोलन चलाने की चेतावनी दी थी। अन्ना हजारे ने अपने इस पत्र में पीएम मोदी को लिखा था कि मोदी सरकार तीन सालों से सत्ता में है, लेकिन अभी तक लोकपाल बिल नहीं ला सकी है।
अन्ना ने पत्र में लिखा था कि वे सरकार तीन सालों में कई बार चिट्ठी लिख चुके हैं, लेकिन न तो चिट्ठियों का कोई जवाब मिला और न ही सरकार ने कोई लोकपाल कदम उठाया। अन्ना हजारे ने स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को लागू कराने की भी मांग की थी। जिसमें किसानों के लिए फूड सिक्योरिटी और किसान कल्याण को लेकर जोर दिया गया है।