उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ज्योतिर्लिंग महाकाल क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि पूजा पद्धति से कोर्ट का कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट ने आरओ के पानी से शिवलिंग का अभिषेक, भस्मारती के बारे में भी कोई निर्देश नहीं दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में पूजा के नए नियमों को कोर्ट का आदेश बताकर लागू कराने पर मंदिर प्रबंधन समिति को फटकार लगाई और कहा कि हमारा आदेश बताकर मंदिर में लगाए गए बोर्ड तुरंत हटाए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सुनवाई सिर्फ शिवलिंग की सुरक्षा से जुड़े पहलू पर हो रही है न कि पूजा पद्धति या रीति रिवाज के संबंध में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मंदिर प्रबंध समिति को फटकार लगाई और उस वह बोर्ड को तत्काल हटाने को कहा जिसमें सुप्रीम कोर्ट के हवाले से दर्शनार्थियों और पुजारियों के लिए निर्देश जारी कर लगाए गए थे। जिसके बाद मंदिर परिसर से नियम संबंधी बोर्ड हटा दिए गए।
मंदिर समिति ने दिए थे सुझाव
गौरतलब है कि ज्योतिर्लिंग क्षरण (आकार छोटा होने) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एक्सपर्ट कमिटी गठित की थी। विशेषज्ञ कमिटी की रिपोर्ट आने के बाद 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई में मंदिर प्रबंध समिति ने कोर्ट को 7 सुझाव दिए थे। समिति ने अपने जवाब में यह बताया था कि वह ज्योतिर्लिंग क्षरण रोकने के लिए कई उपाय कर रही है। जिसमें आरओ के पानी से अभिषेक, भस्मारती के दौरान ज्योतिर्लिंग को सूती कपड़े से ढंकना, शाम 5 बजे बाद सूखी पूजा करना, गर्भगृह का तापमान नियंत्रित रखना जैसे उपाय शामिल हैं।