प्रसिद्ध लेखक, साहित्यकार और पर्यावरणविद् अमृतलाल वेगड़ का शुक्रवार को निधन हो गया। कई प्रतिभाओं के धनी और दो बार नर्मदा परिक्रमा करने वाले वेगड़ का 90 साल की उम्र में मध्यप्रदेश के जबलपुर में दुनिया को अलविदा कह दिया। वह खराब स्वास्थ्य की वजह से पिछले कुछ समय से वेंटिलेटर पर थे।
'नर्मदा पुत्र' से थे विख्यात
वेगड़ ने दो बार नर्मदा परिक्रमा की थी। पहली बार 1977 में जब वह 50 वर्ष के थे और दूसरी बार 2002 में 75 की उम्र में। उन्होंने नर्मदा के ऊपर चार किताबें भी लिखी हैं। 'अमृतस्य नर्मदा', 'तीरे-तीरे नर्मदा' और 'नर्मदा तुम कितनी सुंदर हो' और 'सौंदर्य की नदी नर्मदा' जिसे काफी प्रसिद्धि मिली।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
वेगड़ महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार और गुजराती और हिंदी में साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए थे।
मुख्यमंत्री शिवराज ने भी श्रद्धांजलि
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वेगड़ को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने ट्विट किया 'मां नर्मदा के जीवनदायनी असीमित स्वरूप को रंगों और शब्दों में अभिव्यक्त करने वाले मूर्धन्य साहित्यकार वेगड़ को श्रद्धांजलि। आपका जाना पर्यावरण, साहित्य और नर्मदा सेवकों सहित देश के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।'
उन्होंने एक अन्य ट्विट में कहा 'वेगड़ ने 82 वर्ष की आयु तक नर्मदा व सहायक नदियों की 4000 किमी से भी अधिक की पदयात्रा की और "सौंदर्य की नदी नर्मदा" सहित वृत्तांत की उनकी तीन पुस्तकें हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला अंग्रेजी और संस्कृत में प्रकाशित हुई हैं। ये साहित्य ही नहीं, समाज की अमूल्य धरोहर हैं।'