राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त मध्य प्रदेश में वर्ष 2020 में अब तक 26 बाघों की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने कहा है कि पिछले छह वर्षों में राज्य में बाघों की औसत मृत्यु दर उनकी जन्म दर की तुलना में कम है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की वेबसाइट के अनुसार मध्य प्रदेश में इस वर्ष अब तक कुल 26 बाघों की मौत हुई हैं, इनमें से प्रदेश के बाघ अभयारण्यों में 21 बाघ मरे हैं, जबकि पांच बाघ अन्य जंगलों में मरे हैं। सबसे अधिक 10 बाघों की मौत बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में हुई है।
वर्ष 2019 में राज्य में 28 बाघों की मौत हुई थी और तीन बाघों के शरीर के अंग शिकारियों के कब्जे से जब्त किए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, देश में बाघों की संख्या में दूसरे स्थान पर रहने वाले कर्नाटक में इस साल अब तक आठ बाघों की मौत हुई है और दो बाघों के शरीर के अंगों की बरामदगी दर्ज की गई।
वहीं, कर्नाटक ने पिछले साल 12 बाघों को खोया था। शाह ने कहा, मध्य प्रदेश में वर्तमान में 124 बाघ शावक हैं। राष्ट्रीय बाघ आंकलन रिपोर्ट 2018 के दौरान बाघ शावकों की गणना नहीं की गई थी। बाघों की अगली गणना में हमारे पास 600 से अधिक बाघ होंगे।
मध्य प्रदेश ने फिर से पाया खोया हुआ दर्जा
गौरतलब है कि 31 जुलाई 2019 को जारी हुए राष्ट्रीय बाघ आंकलन रिपोर्ट 2018 के अनुसार 526 बाघों के साथ मध्यप्रदेश ने प्रतिष्ठित ‘टाइगर स्टेट’ का अपना खोया हुआ दर्जा कर्नाटक से आठ साल बाद फिर से हासिल किया है।
इससे पहले, वर्ष 2006 में भी मध्यप्रदेश को 300 बाघों के होने के कारण टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त था। लेकिन शिकार आदि की वजह से वर्ष 2010 में बाघों की संख्या घटकर 257 रह गई थी।