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जानिए, मेरठवासियों के लिए आजादी का महत्व

Tue, 16 Jul 2013 06:02 PM IST
मेरठ/ब्यूरो
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मां तुझे प्रणाम! अमर उजाला का एक अभिनव अभियान। क्रांतिधरा पर आजादी का महापर्व मनाते हुए पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। मेरठवासियों के लिए यह महापर्व खास महत्व रखता है।
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हो भी क्यों नहीं, इसी धरा से क्रांति का आगाज जो हुआ था। 1857 में यहां से निकली चिंगारी ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया। उसके बाद तो पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह हुआ।

हमारे हजारों वीर सपूत बलिदान हुए। तब जाकर 15 अगस्त 1947 को हमारा देश गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुआ।

मगर अफसोस कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हम न तो अमर शहीदों के बलिदान पर बलिहारी हुए और न ही स्वतंत्रता का जश्न मना पाए। यह दिन बस छुट्टियों और पिकनिक मनाने का दिन बनकर रह गया।
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तभी ‘अमर उजाला’ ने इस महापर्व पर जश्न मनाने और इस जश्न में घर-घर की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 2009 में एक अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ शुरू किया।

यह अभियान सिर्फ क्रांतिधरा मेरठ ही नहीं पूरे राष्ट्र में अपनी पहचान बना चुका है। दस मई को बाबा औघड़नाथ मंदिर में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही अभियान के पांचवें वर्ष की शुरुआत हो चुकी है।

दस मई को ही मेरठ के क्रांतिकारी सैनिकों ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल बजाया था और ग्यारह मई 1857 को दिल्ली में भारतीय झंडा लहराते हुए बहादुर शाह जफर को बादशाह घोषित कर दिया था।

इस शृंखला में अब आगे बच्चों, युवाओं और महिलाओं को भागीदार बनाया जाएगा। इसके लिए ‘अमर उजाला’ अपने सहयोगियों के साथ एक बार फिर कार्यक्रमों की शृंखला ला रहा है।

सभी कार्यक्रम देशभक्ति से ओतप्रोत होंगे। इसके तहत बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता, स्लोगन, निबंध प्रतियोगिता और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता होगी तो युवाओं के लिए आजादी के मतवाले थीम पर आधारित कार्यक्रम।

साहित्य प्रेमियों के लिए कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन होगा। पंद्रह अगस्त को कार्यक्रमों की शृंखला बुलंदियां चूमेंगी जब पूरा शहर राष्ट्रगान के लिए एक साथ खड़ा होगा।
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शाम को शहीदों को समर्पित रंगारंग कार्यक्रम होंगे और आसमां रंगीन आतिशबाजी से नहा उठेगा।

तो आइए आप भी अमर उजाला के साथ इस महापर्व के जश्न में शरीक हों।

स्वतंत्रता दिवस पर सामूहिक राष्ट्रगान के लिए 52 सेकेंड के लिए जरूर रुकें। आजादी का जश्न मनाएं अवकाश नहीं। क्रांतिकारियों की शहादत को नमन करें।
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