बैठक की अध्यक्षता कर रहे सीडीओ मनीष बंसल ने बताया कि इसके साथ ही प्रदूषण की रोकथाम को ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रदूषण मापक तीन मैनुअल सेंसर लगवाने पर सहमति बनी।
इससे इन इलाकों की हवा में प्रदूषण के स्तर का पता लगाकर पराली जलाने से रोकने के साथ हवा साफ बनाने के उपाय कराए जा सकें। जिला पर्यावरण समिति ने पीडब्ल्यूडी को आदेश दिया कि एक माह में गोमती पर बने सभी पुलों के दोनों ओर ऊंची जालीदार बाड़ लगवाने का काम पूरा कराए।
साथ ही जल निगम को निर्देश दिया गया कि वह 15 दिनों में 33 नालों का परीक्षण कर सुनिश्चित कराए कि गोमती में गिरने से पहले इन पर ठोस अपशिष्ट रोकने के लिए सुरक्षा जाली लगी है या नहीं।
समिति ने चेताया कि इसमें शिथिलता बरतने वालों पर कार्रवाई होगी। बैठक में एलडीए को निर्देश दिया गया कि वह गहला कूड़ा डंपिंग स्थल के पास वन विभाग को ऐसे पौधे लगाने को पर्याप्त जगह दे, जो कूड़े से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम में सहायक बनें।
वहीं, अगले साल से सघन पौधरोपण अभियान में वन विभाग एनबीआरआई के साथ मिलकर ऐसे पौधे लगाएगा जो हवा में प्रदूषण को शोषित कर लें। बैठक में जिला प्रशासन, वन विभाग, एलडीए, नगर निगम पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।