प्रतापगढ़ में कुंडा के सीओ जियाउल हक हत्याकांड के मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार ने फुलचन्द्र यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, रामलखन गौतम, छोटे लाल यादव, राम आसरे, मुन्ना पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पटेल उर्फ बुल्ले को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी रहे सुधीर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट नौ अक्तूबर को आरोपियों को सजा सुनाएगी।
इसके पहले कोर्ट में जमानत पर चल रहे सभी आरोपी हाजिर हुए। कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को नौ अक्तूबर को सजा सुनाने के लिए जेल से तलब किया है। पत्रावली के अनुसार दो मार्च 2013 की शाम साढ़े सात बजे जमीन विवाद के चलते प्रतापगढ़ के कुंडा के बलीपुर गांव के प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना की सूचना पर बड़ी संख्या में प्रधान नन्हे यादव के समर्थक हथियारों से लैस होकर बलीपुर पहुंच गए थे और कामता पाल के घर को आग के हवाले कर दिया था। इस जमाव की जानकारी मिलने पर सीओ कुंडा जियाउल हक, तत्कालीन हाथीगवां थाना प्रभारी मनोज कुमार शुक्ला और कुंडा थाना प्रभारी सर्वेश मिश्र पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे, जहां भीड़ ने पुलिस को घेर लिया। इसपर पुलिसकर्मी भाग गए और भीड़ को समझा रहे सीओ से झड़प में प्रधान नन्हे यादव के छोटे भाई सुरेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद भीड़ ने सीओ जियाउल हक की पिटाई के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी। रात 11 बजे सीओ की तलाश शुरू हुई तो सीओ की लाश प्रधान के घर के पीछे खड़ंजे पर मिला था।
दर्ज हुई थी कुल चार एफआईआर
इस तिहरे हत्या कांड को लेकर कुल चार एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पहली रिपोर्ट थाना प्रभारी मनोज शुक्ला ने प्रधान नन्हे यादव के भाईयों और बेटे समेत दस लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। वहीं, प्रधान और सुरेश की हत्या को लेकर भी एफआईआर दर्ज हुई थी। सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने इस मामले में आखिरी एफआईआर दर्ज कराई थी।
सीबीआई जांच के हुए थे आदेश
पुलिस की विवेचना के दौरान ही शासन ने मामले की विवेचना सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने आठ मार्च 2013 को मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। इस मामले में सीबीआई ने सबसे पहले अप्रैल 2013 में पवन यादव, फुलचन्द्र, मंजीत यादव और नन्हे यादव के किशोर बेटे को गिरफ्तार किया था।