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पढ़िए, राज'रीति' पर क्या कहती है युवा 'नीति'

Mon, 12 Aug 2013 03:06 PM IST
लखनऊ/अंकुर तिवारी
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यूथ में सिस्टम की खामियों को लेकर छटपटाहट है। वे घोटालों, भ्रष्टाचार, बढ़ती महंगाई और बिगड़ती कानून व्यवस्था को जी भर कोसते हैं।
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क्रांतिकारी बदलाव भी चाहते हैं। सीसीडी (कैफे कॉफी डे) और मैक-डी (मॅकडॉनल्डस) में फेसबुक डीपी, कमेंट्स, ट्वीट और नए गैजेट्स व कपड़ों के ब्रांड और डिजाइन की चर्चाओं के बीच वे राजनीति के ताजा मुद्दों पर बात करना नहीं भूलते।

लेकिन ये चर्चाएं कमियां गिनाने और व्यवस्थाओं को कोसने तक ही रह जाती हैं। बात जब सुधार और पहल की आती है तो युवाओं के कदम पीछे हट जाते हैं।

इसके लिए उनके पास तर्क भी हैं। कोई कहता है, आई हेट पॉलिटिक्स, ये बहुत गंदी है, तो किसी का मानना है कि राजनीति सिर्फ पैसे वालों की है।

सच्चाई यह भी है कि बदलाव के लिए कोई आसमान से उतरकर नहीं आएगा। बहानों और वजहों को दरकिनार कर सुधार और पहल की यह मशाल हमें और आपको ही उठानी होगी।

बात को बातों से आगे बढ़ाकर हकीकत में उतारना होगा। इसकी पहल सबसे पहले युवाओं को ही करनी पड़ेगी। ये हमारा नहीं बल्कि हमारे बीच के ही युवाओं का मानना है।
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वे कहते हैं कि अगर भ्रष्टाचार रोकना है तो हमें ये तय करना होगा कि न हम रिश्वत देंगे और न लेंगे। कुछ गलत होता दिखेगा तो चुप नहीं रहेंगे। नेता का चुनाव करने से पहले उसके बारे में भलीभांति जानकारी करेंगे।

किसी के कहने या खुद के फायदे को देखकर वोट नहीं करेंगे। यह पहल ही राजनीति और सिस्टम में सुधार की नई इबारत लिखेगी।

यूथ के आने से बदलेगी सूरत
ज्यादातर युवा नेता बडे़ राजनेताओं के ही बेटे और रिश्तेदार हैं। इसलिए वे उतना खुलकर काम नहीं कर पाते हैं, जैसा उन्हें करना चाहिए। किसी भी युवा नेता की तरफ से अभी तक भ्रष्टाचार के खिलाफ या एजुकेशन सिस्टम को सुधारने, उनमें चीटिंग व पेपर लीक होने से रोकने के लिए पहल नहीं की गई। ये अखरता है।
-शाजेब अख्तर, थ्री स्टार होटल कर्मचारी

यूथ राजनीति को लेकर गंभीर है
राजनीति को गंभीर जिम्मेदारी की तरह लेना चाहिए। युवा नेताओं को अक्सर वरिष्ठ नेताओं के दबाव का सामना करना पड़ता है। इसमें उनकी लीडरशिप की नहीं, बल्कि अनुभव की कमी सामने आती है। इसलिए जो भी युवा राजनीति में आना चाहते हैं वह पूरी तैयारी के साथ आएं। ताकि वे अपनी सोच को पूरी तरह से लागू कर सकें।
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-प्राची, शिक्षिका

खरीदारी से पहले नेट सर्च करते हैं, नेता चुनते समय नहीं
यूथ गैजेट्स से घिरा हुआ। सीसीडी, मैकडी और पिज्जा हट में उसका समय गुजरता है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स से उसे फुर्सत नहीं है। कुछ भी नया सामान खरीदने से पहले यूथ उसके बारे में नेट पर जबरदस्त रिसर्च करता है। सब कुछ जांच-परख कर ही वह कोई सामान लेता है, लेकिन जब बात वोट देने और नेता चुनने की आती है तो वह ऐसा कुछ नहीं करता।
-रोहित सिंह, थियेटर कलाकार
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