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राहुल के गढ़ में युवाओं ने खड़ी की नई मुसीबत!

Thu, 24 Apr 2014 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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युवाओं ने अब राजनीति बदलने के लिए प्रत्याशियों के लिए मांग पत्र तैयार किया है, जिसमें एफीडेविट पर साइन कर प्रत्याशियों को जनता से वादा करना होगा।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं से पढ़ाई करने के बाद लखनऊ के करीब आधा दर्जन से ज्यादा युवा लोगों की राजनीति में भागीदारी सुनिश्चित करने की राह पर चले हैं।

करीब एक साल पहले शुरू हुई कवायद में अब प्रत्याशियों की अपनी संसदीय सीट के विकास के लिए जवाबदेही भी तय करने की पहल उन्होंने की है।

इसके लिए इन युवाओं ने सबसे पहले देश की राजनीति का केंद्र बनी अमेठी को पहले चरण में चुना है। इन युवाओं का अगला निशाना वाराणसी और लखनऊ जैसी सीट होंगी।

करना होगा एफीडेविट पर साइन

लोकसंग्रह अभियान के नाम से छेड़ी गई मुहिम में शामिल विनोद यादव ने बताया कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स की पढ़ाई के बाद विदेशी नौकरी की जगह मुझे अपने लोगों के लिए काम करना ज्यादा जरूरी लगा।

राजस्थान, बिहार में काम करने के बाद अब लखनऊ को हमने अपना केंद्र बनाया है। उनकी ही तरह पुणे से इंजीनियरिंग और आईआईएम बंगलुरू से एमबीए कर लखनऊ निवासी शमीना बानो, आईआईएम लखनऊ से एमबीए व आईआईटी कानपुर से बीटेक कर अरुण गौरव ने राजनीति में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया।

शमीना बानो ने बताया कि हम अमेठी के सभी प्रत्याशियों से एफीडेविट पर साइन कराकर हम उनकी जवाबदेही तय करेंगे।

इस शपथपत्र में मुख्यरूप से लोगों की छह मांगों को शामिल किया गया है। इन मांगों को अमेठी में सर्वे कर जुटाया गया था।

अमेठी हुई षड्यंत्र की शिकार

लखनऊ की जगह अमेठी को पहले चुनने पर विनोद यादव का कहना था कि राजस्थान और बिहार में लोकसंग्रह अभियान हम कर चुके थे। हमारा फोकस राजनीति के साथ आर्थिक और सामाजिक पहलू पर भी था।

अगर लखनऊ को देखें तो यहां लोग इन तीनों ही बिंदुओं के लिए जागरूक हैं। वहीं, अमेठी राजनीतिक षणयंत्र का शिकार हो गई। यहां आर्थिक और सामाजिक फायदे लोगों को नहीं मिले।

हमारी राज्य सरकार अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ उम्मीदवार न लाकर समर्थन तो करती हैं। वहीं, वहां विकास न कराकर यह भी सुनिश्चित कर देती हैं कि राहुल गांधी के होने के बावजूद कुछ नहीं हुआ।

हम लोगों तक इस चुनाव में एक संदेश देना चाहते थे। वह अमेठी से ही संभव हो सकता था।

यह भी बने टीम का हिस्सा

आलोक सिंह (लखनऊ निवासी, आईआईएससी बंगलुरू से एमटेक), तिलकराज मिश्रा (गोरखपुर निवासी, मोतीलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से बीटेक), शैफाली मिश्रा (लखनऊ निवासी, लंदन इंस्टीट्यूट ऑफ इकॉनोमिक्स से पीजी, यूएन में नौकरी)

इसके अलावा डॉ. अमिता यादव (लखनऊ निवासी, सीडीआरआई से पीएचडी), राज यादव (लखनऊ निवासी, शोभित यूनिवर्सिटी से बीटेक), डेविड डेनिक्स (लखनऊ निवासी, प्रोफेशनल, ऑनलाइन एग्जाम अलग-अलग यूनिवर्सिटी-कालेज में)

प्रत्याशियो को लेनी होगी शपथ
बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर कृषि, बेहतर संसाधन जैसे पानी, बिजली, यातायात, बेहतर रोजगार, बेहतर गवर्नेंस।

यह रहेगी शपथ

अमेठी के लोग मांग करते हैं कि सभी प्रत्याशियों को विजय या पराजय के बाद भी यहां रहकर लोगों के लिए काम करना होगा, क्योंकि अमेठी केवल राजनीतिक अखाड़ा नहीं है और यहां व्यक्ति सिर्फ वोट नहीं है।

अमेठी का जन लोकसंग्रह मंच के माध्यम से प्रत्येक प्रत्याशी से वचन मांगता है कि चुनाव में जीतने पर वह इस मांगपत्र पर काम करेंगे/करेंगीं।

यदि वह तीन साल में मांगपत्र की एक तिहाई मांगें भी पूर्ण करने में असफल रहे तो संसद की सदस्यता से त्यागपत्र देंगे।
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जागरूकता के लिए छपवाएंगे किताबें

विनोद यादव ने बताया कि हमारे ग्रुप ने महात्मा गांधी की किताब हिन्द स्वराज को प्रिंट कर बंटवाया। करीब 80,000 कॉपी इसकी छपवाई गई।

निशुल्क वितरण के लिए प्रिंट हुई इस किताब पर हमें केवल 10 रुपये प्रति कॉपी ही खर्च करना पड़ा। करीब 20,000 कॉपी हमें डोनेशन में मिल गई।

अब हमने वृद्धावस्था पेंशन जैसी दूसरी योजनाओं का लाभ पाने के लिए जरूरी पेंचीदगियों के लिए किताब प्रिंट करने की योजना बनाई है। हमारा मानना है कि हर व्यक्ति की इंटरनेट की पहुंच नहीं हो सकती।

लखनऊ सहित दूसरी जगहों पर लोगों शिक्षित करने के साथ इस पुस्तक का वितरण भी किया जाएगा।
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