सस्ते के चक्कर में यदि लखनऊ की अवैध कॉलोनियों में मकान या प्लॉट खरीद रहे हैं तो सतर्क हो जाएं। आपको जमीन की कीमत से कहीं अधिक विकास शुल्क एलडीए को देना पड़ सकता है।
प्रदेश सरकार ने अवैध कॉलोनियों के विकासकर्ताओं की संपत्तियां जब्त कर विकास का खर्च वसूलने का आदेश किया है। लेकिन विकासकर्ता बिल्डर सरकार से दो कदम आगे हैं।
उन्होंने भूखंड या मकान बेचने के समय अनुबंध में ही यह शर्त लगा दी है कि भविष्य में सक्षम अधिकारी से कोई विकास शुल्क या अन्य चार्ज लगता है तो ग्राहक या आवंटी इसे देगा। यह खुलासा तब हुआ जब एलडीए ने विहित प्राधिकारी के आदेश के बाद गोमतीनगर के आसपास की कॉलोनियों के 11 विकासकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कराई।
यहां जब विकास का खर्च पता करने के लिए एलडीए ने सर्वे शुरू कराया तो पता चला कि बिल्डरों ने ग्राहकों के साथ की सेलडीड में लिखा दिया है कि विकासकर्ता आवासीय समिति या बिल्डर पर विकास शुल्क की देयता नहीं होगी। ऐसे में सीधे तौर पर यह खर्च अब अवैध कॉलोनियों में रहने वालों या फिर विकास प्राधिकरण को वहन करना होगा।