कोरोना के चलते नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल गार्डन प्रशासन की आय गिर गई है। ऐसे में वन्यजीवों के लिए खानपान की व्यवस्था करने के लिए लोगों से आगे आने की अपील की गई है। वहीं लोगों के लिए भी ये अच्छा मौका है, यदि आप भी जू के ब्रांड एंबेसडर बनना चाहते हैं तो वन्यजीवों को खुद भी गोद लें और दूसरों को भी प्रेरित कर भी यह टाइटिल हासिल कर सकते हैं।
ऐसे किया जा सकता है अंगीकृत
जू निदेशक आरके सिंह का कहना है कि जो लोग वन्यजीवों को अंगीकृत करना चाहते हैं वे उनके भोजन का व्यय देकर उन्हें अंगीकृत कर सकते हैं। यह व्यय मासिक, त्रैमासिक, छमाही और एक वर्ष या उससे अधिक समय के लिए भी हो सकता है।
कार्यालय या नीचे दिए गए नंबरों पर करें संपर्क
निदेशक का कहा है कि जो लोग अंगीकरण प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं वे प्राणि उद्यान के कार्यालय में संपर्क करें या फिर नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
इनसे करें संपर्क : 8005493627 अनूप चतुर्वेदी
8005493608 रामचरन
चिंकारा, शेर पूंछ बंदर को इन्होंने लिया गोद, अब आपकी बारी
क्लास 12 में पढ़ने वाले अदव्य शर्मा और क्लास 9 में पढ़ने वाले 14 साल के अमल शर्मा ने अपनी पॉकेट मनी से लॉयन टेल मंकी और डेमोसाइल क्रेन के छह माह के भोज का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है। दोनों भाई हैं। अदव्य कहते हैं कि हम कई बार पापा के साथ प्राणि उद्यान गए हैं, हमारी वहां के लगभग सभी वन्यजीवों से दोस्ती है। कोरोना काल में बहुत सारे लोगों के आगे खाने का संकट खड़ा हुआ था। हमें पता चला कि चिड़ियाघर के जीवों के लिए भी संकट है, ये बेजुबान बोल नहीं सकते, लेकिन हम इन्हें समझ तो सकते हैं। हमने पापा से इच्छा जाहिर की थी कि हमारे पास पॉकेट मनी है और इससे हम कुछ करना चाहते हैं। पापा ने जू के अधिकारियों से बात की और हमने दो वन्यजीवों को गोद लिया। इसके बाद हमारी कजिन सिस्टर अनविता शर्मा जो अभी पांच साल की है, उसके नाम पर भी चिंकारा को गोद लिया गया है। अमन और अदव्य केजीएमयू के डॉक्टर अरुण कुमार शर्मा के बेटे हैं और अवंतिका उनकी भतीजी हैं।
अब तक 25 लोगों को प्रेरित कर चुके
कई बार चिड़ियाघर जाना हुआ है। लॉकडाउन के दौरान जब चारों तरफ बंदी थी, सन्नाटा था तो वन्यजीवों से अक्सर मुलाकात हो जाती थी। तब उन्हें करीब से देखा और समझा। पता चला कि वहां गोद देने की प्रक्रिया है, जिससे वन्यजीवों की खुराक का प्रबंध होता है। इन दिनों दर्शक कम आने से चिड़ियाघर की आय कम हो गई है। इसी के बाद हमने लोगों से बात की, लोग राजी हुए और गोद लेने को आगे आए।
- चिरंजीव नाथ सिन्हा, एडीसीपी सेंट्रल व ब्रांड एंबेसडर जू
बच्चों को जोड़ें, बेजुबानों के प्रति संवेदनशील बनेंगे
अमन और अदव्य की वन्यजीवों को गोद लेने की मांग के बाद मुझे लगा कि ये एक जरिया है बच्चों को प्रकृति के करीब लाने का भी। उन्हें संवेदनशील बनाने का इससे बेहतर माध्यम और कुछ नहीं हो सकता है।
- डॉ. अरुण कुमार शर्मा, मेडिकल डायरेक्टर, केजीएमयू, यूपी कम्युनिटी आई बैंक