यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
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अखिलेश यादव अगर मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि पर भाजपा के दृष्टिकोण के साथ खड़े होंगे तो उनका मुस्लिम वोट छिटकने का खतरा है और यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो भाजपा उनके यदुवंशियों का प्रतिनिधित्व करने या कृष्ण का वंशज होने के दावे पर हमला बोलकर उनके हिंदू वोटों में सेंध लगाने की कोशिश करेगी। दरअसल, योगी ने नाम भले ही नहीं लिया लेकिन यही बताने का प्रयास किया है कि मुस्लिम वोट पाने और उन्हें खुश करने के लिए गैर भाजपा दलों के शासन में अयोध्या, मथुरा, काशी के विकास की अनदेखी की गई। योगी यह समझाने में कामयाब दिख रहे हैं कि अयोध्या की तरह काशी और मथुरा का मामला किसी आक्रांता द्वारा मंदिर को मस्जिद में बदलने भर का नहीं है बल्कि लोकआस्था और सनातन संस्कृति के सम्मान, अस्मिता और पहचान को मिटाने के षडयंत्र का है। अच्छा यही होगा कि इन दो स्थलों पर विरोधी दावे छोड़ दें अन्यथा बात आगे बढ़ेगी। योगी की ये बातें खुद को मोदी और योगी से बड़ा हिंदू बताने वाले गैर भाजपा दलों के नेताओं को हिंदुत्व की पिच पर खेलने और हिंदुओं के वोटों में हिस्सा बंटाने का आमंत्रण देती दिखती हैं। पर, चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि इससे उसके मुस्लिम वोट फिसलने का खतरा है।
फिलहाल तो बाजी मारती दिख रही भाजपा
अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पहुंच रही भीड़ और बीते दिनों वाराणसी में व्यास जी के तहखाने में न्यायालय से मिली पूचा अर्चना की अनुमति के मद्ददेनजर मुख्यमंत्री योगी का भाषण तमाम अन्य गूढ़ निहितार्थ भी छिपाए दिखता है। योगी ने विपक्ष से ''शबरी और निषादराज क्या पीडीए (पिछड़ा-दलित और अल्पसंख्यक) नहीं? '' सवाल पूछकर जो निशाना साधा है। उससे बचने के लिए विपक्ष को बहुत जतन करनी पड़ेगी। योगी के भाषण से साफ है कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद भी लोकसभा चुनाव में हिंदुत्व ज्यादा सशक्त मुद्दा बनने जा रहा है।
भाजपा एक बड़े वायदे को पूरा करने के तथ्य के साथ मैदान में होगी ही लेकिन उसकी झोली में तमाम तर्कों व तथ्यों के साथ काशी व मथुरा वाले अन्य स्थानों के लिए भी आश्वासन होंगे। साथ ही निषादराज, शबरी, जटायु जैसे उदाहरणों के साथ सोशल इंजीनियरिंग के साथ हिंदुत्व सधेगा । संकेत यह भी हैं कि रामराज के संकल्प की अवधारणा पर ''सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास- सबका प्रयास'' के उदाहरण से गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए हुए कामों से विपक्ष की जातीय गणित की राजनीति का जवाब दिया जाएगा। अब जब राम के साथ कृष्ण और शिव भी चुनाव में मुद्दा बनकर गूंजेंगे तो सिर्फ उत्तर से दक्षिण ही नहीं बल्कि पूरब से पश्चिम भी सधने की उम्मीद की जानी चाहिए।