प्रदेश सरकार ने भत्ते समाप्त किए जाने के खिलाफ कर्मचारियों के आक्रोश व संभावित आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। छह महीने के लिए हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने के अगले ही दिन शनिवार को सरकार ने 'काम नहीं तो वेतन नहीं' का फरमान जारी कर दिया।
अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल ने कहा है कि कुछेक संगठन कार्य स्थल पर विभिन्न तरह का प्रतिरोध कर सकते हैं। इससे कोरोना नियंत्रण का कार्य प्रभावित होगा।
नए निर्देशों से कर्मचारी ड्यूटी के प्रति समर्पित रहेंगे और न हड़ताल में शामिल होंगे। न इसमें सहायता करेंगे। वहीं सेवा संघों को साफ कह दिया है कि हड़ताल करने, धीरे कार्य करने या कोई अन्य तरीका अपनाने के लिए न तो प्रेरित करेंगे ना उकसाएंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों तथा प्रदेश के समस्त मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई के विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं।