क्या था मामला
प्रदेश में डॉक्टरों के साथ नर्सिंग, पैरामेडिकल एवं अन्य संवर्ग के कर्मचारियों के संबंध में महानिदेशालय ने मुख्य चिकित्साधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से सूचना मांगी थी। इसी सूचना के आधार पर स्थानांतरण किए गए। ऐसे में कई तबादले शासन की ओर से निर्धारित स्थानांतरण नीति के खिलाफ हो गए हैं। पूरे मामले को लेकर पांच सदस्यीय कमेटी गठित की। इस कमेटी की पड़ताल में यह बात सामने आई कि जिले स्तर से भेजी गई सूचनाएं गलत थीं, जिसकी वजह से स्थानांतरण पॉलिसी का पालन नहीं हो पाया। इस पर सभी सीएमओ व सीएमएस को नोटिस जारी किया गया था।
इन जिलों के अधिकारियों को नोटिस जारी
सीएमएस लोकबंधु अस्पताल लखनऊ, सीएमएस एसएसपीजी अस्पताल वाराणसी, सीएमएस मंडलीय अस्पताल आजमगढ़, सीएमओ गौतमबुद्ध नगर, सीएमएस राजकीय जिला संयुक्त चिकित्सालय गौतमबुद्ध नगर, सीएमओ बस्ती, सीएमओ रायबरेली, पंडित कमला पति त्रिपाठी अस्पताल चंदौली के सीएमएस, सीएमओ उन्नाव,सीएमओ मऊ, सीएमओ अमेठी, सीएमओ सीतापुर, सीएमओ बरेली, सीएमओ आजमगढ़, सीएमओ मुरादाबाद, सीएमओ अलीगढ़, सीएमओ कानपुर देहात, सीएमओ संत कबीर नगर, सीएमओ वाराणसी, सीएमओ आगरा, सीएमओ कुशीनगर, सीएमओ हाथरस, एमएमजी जिला चिकित्सालय गाजियाबाद के सीएमएस, सीएमओ भदोही, सीएमओ अयोध्या सीएमओ मेरठ, सीएमओ प्रतापगढ़, सीएमओ चंदौली, विकिरण निदेशालय लखनऊ के अधीक्षक शामिल हैं।
क्या कहती हैं जिम्मेदार
सीएमओ व सीएमएस के स्पष्टीकरण की पड़ताल की गई है। उन सभी ने कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं। ऐसे में शासन को वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है। आगे की कार्रवाई शासन स्तर से होगी। - डॉ. लिली सिंह, महनिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य।