प्रदेश सरकार ने ऐसा उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 की धारा 50 की उपधारा 6 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया है। स्नातकोत्तर में न्यूनतम 55 फीसदी अंक और पीएचडी की अर्हता पहले की तरह ही बरकरार रहेगी। लेकिन, आचार्य या सह आचार्य (उप आचार्य) के पद पर 15 वर्ष का अनुभव की शर्त हटा दी गई है।
इसके बजाय 15 वर्षों के अध्यापन, शोध और प्रशासन का अनुभव ही पर्याप्त होगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि शासकीय महाविद्यालयों और अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य के लिए अर्हता एवं चयन प्रक्रिया यथावत रहेगी।